
शिवपुरी।
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से मानवता को झकझोर देने वाली हृदयविदारक घटना सामने आई है। देहात थाना क्षेत्र स्थित ईदगाह परिसर में एक महिला नवजात शिशु को जन्म के तुरंत बाद छोड़कर फरार हो गई। कुछ समय बाद वही मासूम एक कुत्ते के मुंह में दबा हुआ मदरसा परिसर तक पहुंचा, जहां यह भयावह दृश्य देखकर हर कोई सन्न रह गया।
जब तक लोगों को घटना की जानकारी मिलती, तब तक नवजात की मौत हो चुकी थी। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है।
रूई में लिपटा मिला नवजात
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, एक कुत्ता नवजात को मुंह में दबाकर ईदगाह परिसर स्थित मदरसा तक ले आया। मदरसे में मौजूद लोगों ने जब यह दृश्य देखा तो उन्होंने कुत्ते से बच्चे को छुड़ाने का प्रयास किया। भयभीत कुत्ता शव को वहीं छोड़कर भाग गया।
जांच में सामने आया कि नवजात को रूई में लपेटा गया था, जिससे आशंका जताई जा रही है कि बच्चा जिंदा अवस्था में ही परिसर में फेंका गया और बाद में ठंड, भूख या समय पर इलाज न मिलने से उसकी मौत हो गई।
CCTV में कैद हुई संदिग्ध महिला
पुलिस के अनुसार, नवजात को छोड़ने वाली महिला ईदगाह परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है। फुटेज में एक महिला रूई में लिपटा बच्चा लेकर आती और उसे परिसर में छोड़कर जाते हुए दिखाई दे रही है।
पुलिस अब उसी फुटेज के आधार पर महिला की पहचान और तलाश में जुटी हुई है।
घर पर प्रसव की आशंका
नवजात की नाभि पर कॉर्ड क्लैंप नहीं पाए जाने से यह आशंका जताई जा रही है कि प्रसव घर पर ही कराया गया होगा। हालांकि ईदगाह परिसर के पास अस्पताल मौजूद होने के कारण यह संभावना भी जताई जा रही है कि महिला वहां से बच्चा लेकर आई हो। फिलहाल इस संबंध में स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
समाज में उठे कई सवाल
घटना के बाद क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। लोगों का कहना है कि संभवतः किसी अविवाहित महिला ने सामाजिक भय या बदनामी के डर से यह अमानवीय कदम उठाया हो। हालांकि पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही वास्तविक कारण सामने आ सकेगा।
पुलिस ने शुरू की जांच
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और नवजात के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया गया। मामले में मर्ग कायम कर विस्तृत विवेचना शुरू कर दी गई है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही महिला की पहचान कर उसे हिरासत में लिया जाएगा और यह स्पष्ट किया जाएगा कि नवजात की मौत लापरवाही से हुई या यह जानबूझकर किया गया अपराध।
इस घटना ने एक बार फिर समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आज भी भय, बदनामी और सामाजिक दबाव मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ रहे हैं।