Monday, June 15

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टेक इतिहास: जब रविवार की सुबह स्टीव जॉब्स ने गूगल को फोन कर ‘पीले रंग’ पर जताई आपत्ति

 

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तकनीक की दुनिया में स्टीव जॉब्स को सिर्फ Apple के सह-संस्थापक या सीईओ के रूप में नहीं, बल्कि एक असाधारण परफेक्शनिस्ट और दूरदर्शी के तौर पर याद किया जाता है। उनकी इसी बारीकी पर पकड़ का एक दिलचस्प किस्सा आज भी टेक इंडस्ट्री में मिसाल के रूप में पेश किया जाता है। यह घटना वर्ष 2008 की है, जब स्टीव जॉब्स ने गूगल के लोगो में इस्तेमाल किए गए पीले रंग को लेकर कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी को रविवार की सुबह फोन कर दिया था।

 

यह किस्सा गूगल के पूर्व वाइस प्रेसिडेंट विक गुंडोत्रा ने साझा किया था। उस समय iPhone नया-नया लॉन्च हुआ था और मोबाइल इंटरनेट के अनुभव को नई दिशा दे रहा था।

 

रविवार की सुबह आया ‘अर्जेंट’ फोन

 

विक गुंडोत्रा के अनुसार, जनवरी 2008 की एक रविवार सुबह उन्हें स्टीव जॉब्स का फोन आया। जॉब्स ने बातचीत की शुरुआत यह कहते हुए की कि एक बेहद जरूरी समस्या है, जिसे तुरंत ठीक करना चाहिए। गुंडोत्रा को लगा कि शायद कोई गंभीर तकनीकी गड़बड़ी हो गई है, लेकिन असल वजह जानकर वह हैरान रह गए।

 

स्टीव जॉब्स ने कहा कि वह iPhone पर गूगल का लोगो देख रहे थे और उसमें इस्तेमाल किया गया दूसरा ‘O’ का पीला रंग उन्हें सही नहीं लग रहा था। जॉब्स का मानना था कि उस रंग का शेड ब्रैंड के साथ न्याय नहीं कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी टीम से इसे ठीक करवा सकते हैं और इसके लिए उन्होंने गुंडोत्रा से सहमति मांगी।

 

आज भी दिखता है जॉब्स का सुझाव

 

विक गुंडोत्रा बताते हैं कि स्टीव जॉब्स ने न केवल उस बारीकी को तुरंत पहचाना, बल्कि उसे सुधारने की जिम्मेदारी भी खुद लेने की पेशकश की। दिलचस्प बात यह है कि आज भी गूगल के पारंपरिक लोगो में दूसरे ‘O’ का पीला रंग उसी सुझाव के अनुरूप माना जाता है। हालांकि समय के साथ गूगल ने अपनी ब्रैंडिंग को ‘G’ आइकन तक सीमित कर दिया है, लेकिन कई प्लेटफॉर्म पर पूरा लोगो अब भी देखने को मिलता है।

 

बारीकियों में छिपी थी कामयाबी की कुंजी

 

यह किस्सा स्टीव जॉब्स की कार्यशैली और सोच को स्पष्ट करता है। उनका मानना था कि अगर छोटी-छोटी चीजों को पूरी ईमानदारी और परफेक्शन के साथ किया जाए, तो बड़े नतीजे अपने-आप बेहतर हो जाते हैं।

एक इंटरव्यू में जॉब्स ने कहा था कि इनोवेशन अक्सर अचानक होने वाली बातचीत, देर रात की कॉल या अनौपचारिक चर्चाओं से जन्म लेता है।

 

विक गुंडोत्रा के अनुसार, स्टीव जॉब्स के लिए क्रिएटिविटी सिर्फ बड़े विचारों तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन सूक्ष्म बातों पर ध्यान देने में थी, जिन्हें अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। उनके मुताबिक, यह घटना उनके लिए एक बड़ा सबक थी कि एक सीईओ को रविवार के दिन भी पीले रंग के शेड जैसी छोटी चीजों की परवाह करनी चाहिए।

 

एक विजनरी की अमिट विरासत

 

5 अक्टूबर 2011 को 56 वर्ष की आयु में कैंसर से लंबी लड़ाई के बाद स्टीव जॉब्स का निधन हो गया, लेकिन उनका विजन और काम करने का तरीका आज भी टेक इंडस्ट्री को प्रेरित करता है। वह खुद को पहले एक कलाकार मानते थे, जो हर पिक्सल को तराशने में विश्वास रखते थे।

रविवार की उस सुबह किया गया फोन आज भी यह याद दिलाता है कि महानता सिर्फ बड़े फैसलों से नहीं, बल्कि सबसे छोटी बारीकियों के प्रति ईमानदारी से भी हासिल होती है।

 

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