
पायलट बनने का सपना कई युवाओं का होता है। यह पेशा सिर्फ बादलों के ऊपर उड़ान भरने का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और समर्पण का भी प्रतीक है। आइए जानते हैं, एक पायलट की मंथली सैलरी कितनी होती है और उनके ऊपर प्लेन उड़ाने के अलावा कौन-कौन सी जिम्मेदारियां होती हैं।
कमर्शियल पायलट कैसे बनें?
कमर्शियल पायलट बनने के लिए उम्मीदवार को फिजिक्स और मैथ्स के साथ 12वीं पास होना जरूरी है। इसके बाद किसी मान्यता प्राप्त फ्लाइंग स्कूल से ट्रेनिंग लेकर CPL (कमर्शियल पायलट लाइसेंस) लेना होता है। यह लाइसेंस DGCA द्वारा जारी किया जाता है।
पायलट की ट्रेनिंग और खर्चा
CPL हासिल करने के लिए लगभग 200 घंटे की फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी करनी होती है और कई एग्जाम पास करने पड़ते हैं। इस पूरे प्रोसेस में खर्च लगभग 35 लाख से 1 करोड़ रुपये तक हो सकता है, जो फ्लाइंग स्कूल, ट्रेनिंग के घंटे और टाइप रेटिंग पर निर्भर करता है।
पायलट की 4 बड़ी जिम्मेदारियां
- फ्लाइट प्लानिंग: उड़ान से पहले मौसम, रूट, एयर ट्रैफिक और ऑप्शनल एयरपोर्ट की योजना बनाना।
- एयरक्राफ्ट जांच: टेक्निकल सिस्टम की जांच करना – फ्यूल, ब्रेक, नेविगेशन, लाइट्स आदि।
- एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क: पूरी उड़ान में ATC के साथ संपर्क बनाए रखना।
- आपातकालीन निर्णय: खराब मौसम या तकनीकी खराबी जैसी स्थिति में तुरंत सही निर्णय लेना।
पायलट की सैलरी
फ्रेशर पायलट: ₹1.5 लाख से ₹3 लाख प्रति माह।
2-5 साल का अनुभव: ₹4 लाख से ₹6 लाख प्रति माह।
5 साल से अधिक अनुभव (कैप्टन): ₹8 लाख से ₹12 लाख या उससे अधिक।
इंटरनेशनल फ्लाइट्स: सैलरी में 2-3 लाख रुपये और बढ़ सकते हैं।
पायलट को मिलने वाली सुविधाएं
सैलरी के अलावा पायलट को हाउसिंग अलाउंस, ट्रैवल बेनिफिट्स, हेल्थ इंश्योरेंस और अन्य भत्ते भी मिलते हैं।
निष्कर्ष
पायलट का पेशा न सिर्फ ऊंचाइयों तक पहुँचने का है, बल्कि इसमें संकट में सोच-समझकर निर्णय लेने और सुरक्षित उड़ान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी शामिल है। इसलिए यह पेशा चुनने वालों के लिए चुनौती और सम्मान दोनों का प्रतीक है।