
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण संस्थान है। इसके हाथों में करोड़ों छात्रों का भविष्य होता है। कॉलेज और विश्वविद्यालयों को मान्यता देने, उनके मानकों को बनाए रखने और छात्रों के हितों की रक्षा करने की जिम्मेदारी UGC की होती है।
यूजीसी क्या है?
UGC का फुल फॉर्म यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन है। यह भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत काम करता है और हायर एजुकेशन को बढ़ावा देने, टीचिंग, एग्जाम और रिसर्च के मानक निर्धारित करने और उन्हें बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालता है। 1956 में संसद के यूजीसी एक्ट के तहत इसे वैधानिक दर्जा मिला और यह केंद्र व राज्य सरकारों को उच्च शिक्षा के विकास में सलाह देता है।
इतिहास और गठन
UGC का विचार 1944 की सार्जेंट रिपोर्ट में आया। 1945 में यह तीन केंद्रीय विश्वविद्यालयों – अलीगढ़, बनारस और दिल्ली – की देखरेख के लिए बनाया गया। स्वतंत्रता के बाद, 28 दिसंबर 1953 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री अबुल कमाल आजाद ने इसका औपचारिक उद्घाटन किया। 1956 में इसे संसद द्वारा वैधानिक रूप दिया गया।
यूजीसी के कार्य
हायर एजुकेशन को बढ़ावा देना।
डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट्स की मान्यता सुनिश्चित करना।
टीचिंग, परीक्षा और रिसर्च के मानक तय करना।
उच्च शिक्षा संस्थानों को अनुदान देना और उनके विकास में सहयोग करना।
छात्रों के हितों की रक्षा करना, एंटी रैगिंग नियम लागू करना, करियर और प्लेसमेंट गाइडेंस देना।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन और इंटर्नशिप प्रोग्राम को लागू करना।
यूजीसी और कानून
UGC रेगुलेशंस और गाइडलाइंस तैयार करता है, जिन्हें गजट ऑफ इंडिया में प्रकाशित कर कानूनी रूप से लागू किया जाता है। ये नियम उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए बाध्यकारी होते हैं।
नया कानून: इक्विटी एक्ट 2026
13 जनवरी 2026 को UGC ने प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026 लागू किया, जिसे इक्विटी एक्ट 2026 भी कहा जा रहा है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा में समान अवसर सुनिश्चित करना और धर्म, जाति, लिंग, दिव्यांगता आदि के आधार पर भेदभाव रोकना है। प्रत्येक संस्थान में इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर (EOC) बनाया जाएगा, जो भेदभाव की शिकायतों को संभालेगा और कमजोर वर्ग के छात्रों को सहायता देगा।
विरोध और विवाद
देशभर में इस नए कानून का विरोध हो रहा है। यूपी, बिहार, राजस्थान समेत कई राज्यों में इसे ‘काला कानून’ कहा जा रहा है। कुछ लोग मानते हैं कि कानून का दुरुपयोग हो सकता है, क्योंकि शिकायतकर्ता को सबूत देने की आवश्यकता नहीं होगी और दोषी को खुद को निर्दोष साबित करने में लंबी लड़ाई लड़नी पड़ सकती है।
यूजीसी का موقف
UGC का कहना है कि यह कानून भेदभाव रोकने के लिए है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और न्यायिक निर्देशों पर आधारित है। शिक्षा मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि इसे गलत तरीके से लागू नहीं होने दिया जाएगा।
निष्कर्ष
UGC करोड़ों छात्रों के भविष्य की जिम्मेदारी संभालता है। चाहे यह नए कानून के विवाद का दौर हो या संस्थागत विकास की पहल, छात्रों और शिक्षा जगत के लिए इसकी भूमिका हमेशा महत्वपूर्ण बनी रहेगी।