
पेरिस/ग्रीनलैंड: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों के बीच यूरोप के देश ग्रीनलैंड को लेकर एकजुट दिख रहे हैं। इसी बीच, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने अपने देश का एकमात्र परमाणु चालित एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गॉल उत्तरी अटलांटिक महासागर की ओर भेजा है। यह कैरियर 40 राफेल फाइटर जेट और कई हेलीकॉप्टरों से लैस है।
फ्रांसीसी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि चार्ल्स डी गॉल का स्ट्राइक ग्रुप अब उत्तरी अटलांटिक की ओर बढ़ रहा है। इसमें डिफेंस फ्रिगेट, सप्लाई शिप और हमलावर पनडुब्बी भी शामिल हैं। इस तैनाती का मकसद यूरोपीय एकजुटता दिखाना और ग्रीनलैंड की संप्रभुता को सुरक्षा प्रदान करना है।
ग्रीनलैंड पर बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव
ग्रीनलैंड को लेकर हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार धमकियां दी थीं। उन्होंने इस क्षेत्र को अमेरिका में शामिल करने के प्रस्ताव का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। हालांकि यूरोपीय विरोध के बाद ट्रंप ने सीधे सैन्य कार्रवाई से कदम पीछे खींच लिए, लेकिन अमेरिका का रुख अब भी सख्त माना जा रहा है।
चार्ल्स डी गॉल की खासियत
चार्ल्स डी गॉल फ्रांसीसी नौसेना का एकमात्र परमाणु ऊर्जा से चलने वाला एयरक्राफ्ट कैरियर है। 2001 में सेवा में आए इस कैरियर में कैटापुल्ट और अरेस्टर वायर की सुविधा है, जिससे यह विभिन्न फिक्स्ड-विंग एयरक्राफ्ट को लॉन्च और रिकवर कर सकता है। चार्ल्स डी गॉल एक समय में 40 एयरक्राफ्ट तक ले जाने में सक्षम है, जिनमें राफेल फाइटर जेट, E-24 हॉकआई EW एयरक्राफ्ट और NH90 हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
आर्कटिक में फ्रांस और यूरोप की सक्रियता
फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ग्रीनलैंड के साथ-साथ डेनमार्क और यूरोपीय नेताओं से सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग पर बैठक करेंगे। फ्रांस और यूरोपीय संघ दोनों ही आर्कटिक क्षेत्र में ग्रीनलैंड के आर्थिक और सामाजिक विकास को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनलैंड और उत्तरी अटलांटिक को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है, और चार्ल्स डी गॉल की तैनाती इस क्षेत्र में यूरोपीय शक्ति की गंभीर चेतावनी भी है।