Thursday, June 18

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सांभर झील में गुपचुप सोलर प्लांट की अनुमति देने वालों को हाईकोर्ट की फटकार, होगी अवमानना कार्यवाही

जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने सांभर झील क्षेत्र में प्रस्तावित सौर ऊर्जा परियोजना से जुड़ी कथित अवैध गतिविधियों पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने बिना अनुमति एमओयू करने वाले अधिकारियों पर अवमानना कार्रवाई करने का फैसला किया है। संवेदनशील वेटलैंड क्षेत्र की सुरक्षा के लिए अदालत ने सख्त प्रतिबंधात्मक आदेशों को दोहराया है।

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स्वतः संज्ञान लिया गया:
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजिव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संगीता शर्मा की खंडपीठ ने 22 जनवरी को यह आदेश पारित किया। अदालत जनहित याचिका और वेटलैंड संरक्षण से जुड़े स्वतः संज्ञान रिट मामले की सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता दिनेश कुमावत ने सांभर झील के पर्यावरणीय मुद्दे उजागर किए।

अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता आर.बी. माथुर ने बताया कि अगस्त 2023 में हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड (एचएसएल) ने एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के साथ सांभर झील पारिस्थितिकी तंत्र की भूमि पर सौर ऊर्जा परियोजना के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया था। यह भूमि एचएसएल की सहायक कंपनी सांभर साल्ट्स लिमिटेड को आवंटित की गई थी, जो अधिसूचित वेटलैंड क्षेत्र का हिस्सा है।

अदालत ने टिप्पणी की:
खंडपीठ ने कहा कि एमओयू हाईकोर्ट में लंबित मामले के दौरान किया गया, और अदालत को इसकी जानकारी नहीं दी गई। इसे न्यायालय को गुमराह करने और न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप का प्रयास माना गया, जो अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत अपराध है।

अधिकारियों को कोर्ट में हाजिर होना होगा:
अदालत ने एचएसएल के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर (सेवानिवृत्त) कमलेश कुमार, एसजेवीएन ग्रीन एनर्जी के अजय कुमार सिंह और सांभर साल्ट्स लिमिटेड के नव नियुक्त सीईओ हर्ष वर्मा के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की है। रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया कि 11 फरवरी को तीनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए समन जारी किया जाए।

यह मामला सुप्रीम कोर्ट के अप्रैल 2017 के आदेश से जुड़ा है, जिसमें सांभर झील जैसी वेटलैंडों के संरक्षण के निर्देश दिए गए थे। राजस्थान हाईकोर्ट लगातार इस मामले की निगरानी कर रहा है।

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