Wednesday, January 28

UGC के नए नियम पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा बयान, कहा – कोई भेदभाव नहीं होगा

डीडवाना/राजस्थान: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ‘उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु’ विनियम, 2026 को लेकर हो रही आलोचनाओं और विरोध-प्रदर्शनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंगलवार को आश्वासन दिया कि इस नियम के लागू होने में किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा और नियम का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।

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प्रधान नागौर जिले के छोटी खाटू में आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने नई शिक्षा नीति और केंद्र सरकार की देशभर में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की पहल पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोई भी छात्र या शिक्षक इस नियम के कारण उत्पीड़न का सामना नहीं करेगा।

प्रधान का बयान:
धर्मेंद्र प्रधान ने संवाददाताओं से कहा,
“मैं सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी को भी किसी प्रकार के भेदभाव या उत्पीड़न का सामना नहीं करना पड़ेगा। कोई भेदभाव नहीं होगा और नियम का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा। चाहे UGC हो, केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, सभी जिम्मेदारियां संविधान के दायरे में ही पूरी होंगी।”

विवाद और विरोध:
UGC के नए नियम के अधिसूचना के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यह विनियमन जाति-आधारित भेदभाव की गैर-समावेशी परिभाषा अपनाता है और कुछ श्रेणियों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखता है।

नए नियम की मुख्य बातें:

  • सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में समता समितियां गठित करना अनिवार्य होगा।

  • इन समितियों में ओबीसी, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दिव्यांग और महिला प्रतिनिधियों को शामिल करना अनिवार्य है।

  • समितियों का उद्देश्य भेदभाव की शिकायतों की जांच करना और समानता को बढ़ावा देना है।

  • नियम का मसौदा पिछले साल फरवरी में जनता से प्रतिक्रिया के लिए जारी किया गया था और 13 जनवरी 2026 को इसे अधिसूचित किया गया।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस आश्वासन से छात्रों, शिक्षकों और उच्च शिक्षा संस्थानों में काम करने वाले अधिकारियों को नियम के सकारात्मक और समावेशी ढंग से लागू होने का भरोसा मिला है।

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