
तेहरान/मिडिल ईस्ट: अमेरिकी हमले की आशंका के बीच ईरान के पारचिन मिलिट्री कॉम्प्लेक्स में मंगलवार शाम धमाके की खबर आई है। यह सैन्य अड्डा बेहद संवेदनशील परमाणु ठिकाना माना जाता है और यहां की हर गतिविधि पर पूरी मिडिल ईस्ट की नजर रहती है। ईरान रिवॉल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने धमाके की जानकारी की पुष्टि की है, हालांकि विस्तृत विवरण नहीं दिया।
संवेदनशीलता और इतिहास
पारचिन कॉम्प्लेक्स वर्षों से अंतरराष्ट्रीय निगरानी में रहा है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों का दावा है कि यहां परमाणु हथियार कार्यक्रम और विस्फोटक कंपोनेंट्स की संभावित टेस्टिंग होती रही है। पिछले साल जून में इजरायल ने इसी ठिकाने को निशाना बनाते हुए बमबारी की थी, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया था।
अमेरिकी तैयारी और मिडिल ईस्ट की स्थिति
अमेरिका ने इस क्षेत्र की पूरी घेराबंदी कर रखी है। यूएसएस अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, गाइडेड मिसाइल विध्वंसक पोतों और 90 फाइटर जेट्स के साथ मिडिल ईस्ट में तैनात है। कतर, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात में THAAD एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय है। अमेरिकी रणनीति के अनुसार, ईरान के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों और नेताओं को निशाना बनाकर हमला किया जा सकता है।
जटिल स्थिति और युद्ध की आशंका
ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी हमले की स्थिति में पूरा युद्ध शुरू करेगा। इस कारण, मिडिल ईस्ट में भीषण युद्ध की आशंका तेज हो गई है। कुछ अरब देशों, जैसे कि संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब, ने ईरान पर हमला करने के लिए अपने एयरस्पेस के इस्तेमाल से इनकार कर दिया है।
सूचना और संचार बाधित
ईरान में इंटरनेट दो हफ्ते से बंद है, जिससे सही जानकारी मिलना मुश्किल हो रहा है। संडे गार्जियन के अनुसार, पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक ने धमाके की पुष्टि की है, लेकिन कारण और जिम्मेदार अभी अज्ञात हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पारचिन में किसी भी घटना, चाहे उसकी पुष्टि हो या न हो, तुरंत मिडिल ईस्ट और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा हलकों में हलचल पैदा कर देती है।