
नई दिल्ली: स्ट्रोक या अन्य न्यूरोलॉजिकल कारणों से बोलने में दिक्कत महसूस करने वाले मरीजों के लिए नई उम्मीद जग गई है। कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक AI वियरेबल कॉलर बनाया है, जिसका नाम Revoice है। इस डिवाइस की मदद से मरीज बिना किसी सर्जरी या दिमाग में इम्प्लांट के फिर से अपनी आवाज में बोलने की क्षमता हासिल कर सकते हैं।
पोर्टेबल और असरदार स्पीच सॉल्यूशन
इस डिवाइस को पहनने वाला व्यक्ति जैसे ही बोलने की कोशिश करता है, Revoice उसके गले से निकलने वाले सूक्ष्म कंपन और भावनात्मक संकेतों को सेंसर के जरिए पहचानता है। AI मॉडल इन संकेतों से बोले गए शब्दों के टुकड़ों को जोड़कर पूरे वाक्य बनाता है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर Luigi Occhipinti के अनुसार, अधिकांश स्ट्रोक मरीज कई बार प्रैक्टिस के बाद वाक्य बोल सकते हैं, लेकिन रोजमर्रा की बातचीत में उन्हें परेशानी होती है। यही वजह है कि ऐसे पोर्टेबल और आसान स्पीच सॉल्यूशंस की बहुत जरूरत है।
तकनीक का काम करने का तरीका
- Revoice LLM (Large Language Model) से लैस है, जो ChatGPT जैसी AI तकनीक पर आधारित है।
- डिवाइस वाक्यों का अनुमान लगाने और गलतियों को सुधारने में मदद करता है।
- छोटे ट्रायल में, पांच डिस्अर्थ्रिया मरीजों पर इसका परीक्षण किया गया, जिसमें वाक्य में होने वाली गलती केवल 2.9% तक रही।
- डिवाइस पहनने वाले की भावनात्मक स्थिति का अंदाजा भी पल्स सिग्नल के जरिए लगाता है।
भविष्य की संभावनाएँ
प्रोफेसर ओचिपिंटी का कहना है कि इस तकनीक का इस्तेमाल पार्किंसंस और मोटर न्यूरॉन डिसीज जैसी अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए भी किया जा सकता है। भविष्य में वैज्ञानिक बहुभाषी डिवाइस विकसित करने की योजना बना रहे हैं, जो मरीज की भावनाओं को समझ सके।
यह रिसर्च Nature Communications जैसे प्रतिष्ठित जर्नल में प्रकाशित हुई है और इसे गंभीर और महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Revoice डिवाइस स्ट्रोक मरीजों के लिए सिर्फ आवाज़ लौटाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि न्यूरोलॉजिकल रोगों से पीड़ित अन्य मरीजों के लिए भी उम्मीद की किरण साबित हो सकता है।
