Friday, January 23

विदेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई | THE रैंकिंग 2026 में ये 10 यूनिवर्सिटीज बनीं टॉप चॉइस

नई दिल्ली, 22 जनवरी।
हायर एजुकेशन के लिए विदेश जाना अब केवल सपना नहीं, बल्कि हजारों भारतीय छात्रों की वास्तविक पसंद बन चुका है। बेहतर शिक्षा व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर, आकर्षक करियर अवसर और ऊंची सैलरी की संभावनाओं के चलते हर साल बड़ी संख्या में छात्र विदेशों का रुख कर रहे हैं। खासतौर पर इंजीनियरिंग उन कोर्सों में शामिल है, जिसके लिए भारतीय छात्र सबसे अधिक विदेशी विश्वविद्यालयों को चुनते हैं।

This slideshow requires JavaScript.

अगर आप भी विदेश में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने की योजना बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। टाइम्स हायर एजुकेशन (THE) ने सब्जेक्ट रैंकिंग 2026 जारी कर दी है, जिसमें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ इंजीनियरिंग यूनिवर्सिटीज की सूची सामने आई है। इस रैंकिंग में अमेरिका का दबदबा एक बार फिर देखने को मिला है, वहीं चीन और सिंगापुर की यूनिवर्सिटीज ने भी सभी को चौंकाया है।

इंजीनियरिंग के लिए दुनिया की टॉप-10 यूनिवर्सिटीज (THE रैंकिंग 2026)

  1. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी – अमेरिका

  2. ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी – ब्रिटेन

  3. मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) – अमेरिका

  4. स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी – अमेरिका

  5. कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी – ब्रिटेन

  6. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले – अमेरिका

  7. कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Caltech) – अमेरिका

  8. पेकिंग यूनिवर्सिटी – चीन

  9. प्रिंसटन यूनिवर्सिटी – अमेरिका

  10. नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) – सिंगापुर

अमेरिका का दबदबा, एशिया की मजबूत एंट्री

THE की इस रैंकिंग में टॉप-10 में से 6 यूनिवर्सिटीज अमेरिका की हैं, जो इंजीनियरिंग शिक्षा में उसके वैश्विक नेतृत्व को दर्शाती हैं। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को इंजीनियरिंग के लिए दुनिया का नंबर-1 संस्थान घोषित किया गया है, जबकि MIT और स्टैनफर्ड जैसी यूनिवर्सिटीज लगातार अपनी उत्कृष्ट रिसर्च और इनोवेशन के लिए जानी जाती हैं।

ब्रिटेन की ऑक्सफर्ड और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने भी टॉप-5 में जगह बनाकर यह साबित किया है कि इंजीनियरिंग के लिए यूके आज भी एक बेहतरीन विकल्प है। वहीं, चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी का टॉप-10 में शामिल होना सबसे चौंकाने वाला माना जा रहा है। पिछले कुछ वर्षों में चीन द्वारा रिसर्च और डेवलपमेंट पर किए गए बड़े निवेश का असर अब वैश्विक रैंकिंग में साफ दिखाई दे रहा है।

इसके अलावा, सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS) ने भी अपनी मजबूत अकादमिक गुणवत्ता और इंडस्ट्री कनेक्शन के दम पर टॉप-10 में जगह बनाई है।

विदेश में इंजीनियरिंग क्यों?

विशेषज्ञों के अनुसार, विदेश में इंजीनियरिंग करने से छात्रों को अत्याधुनिक रिसर्च सुविधाएं, इंडस्ट्री-ओरिएंटेड एजुकेशन और ग्लोबल जॉब मार्केट में बेहतर अवसर मिलते हैं। अमेरिका में जहां इंजीनियरिंग कोर्स आमतौर पर चार साल में पूरे होते हैं, वहीं ब्रिटेन और एशिया के कई देशों में कोर्स की अवधि और लागत भारतीय छात्रों के लिए अनुकूल मानी जाती है।

कुल मिलाकर, THE रैंकिंग 2026 उन छात्रों के लिए एक भरोसेमंद गाइड साबित हो सकती है, जो विदेश में इंजीनियरिंग पढ़कर अपने करियर को नई ऊंचाइयों तक ले जाना चाहते हैं।

Leave a Reply