
बीजिंग: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक और मनमानी विदेश नीति के बीच चीन ने खुद को दुनिया का नया नेतृत्वकर्ता साबित करने की रणनीति शुरू कर दी है। ट्रंप ने टैरिफ और धमकियों के जरिए वैश्विक सहयोगियों पर दबाव बनाया है, जिससे कई देश अब चीन की ओर झुक रहे हैं।
चीन ने खुद को बताया वैकल्पिक वैश्विक नेता
ट्रंप की ग्रीनलैंड पर चेतावनी के कुछ ही घंटों बाद, चीनी उप-प्रधानमंत्री हे लिफेंग ने सालाना अल्पाइन बैठक में कहा कि बीजिंग “लगातार साझा भविष्य वाले समुदाय की सोच पर काम कर रहा है और बहुपक्षवाद व मुक्त व्यापार का समर्थन करने में दृढ़ है।” उन्होंने जोर देकर कहा, “हम सहयोग और एकजुटता को प्राथमिकता दे रहे हैं, और फूट व टकराव के बजाय समाधान पेश कर रहे हैं। दुनिया की आम समस्याओं के लिए चीन समाधान प्रस्तुत कर रहा है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की यह रणनीति ट्रंप प्रशासन की विदेशी नीति के झटकों के मुकाबले चीन को शांत, तर्कसंगत और भरोसेमंद विकल्प के रूप में पेश करती है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग लंबे समय से विश्व व्यवस्था में बदलाव की बात कर रहे हैं और अमेरिका के वर्चस्व के विकल्प के रूप में चीन को वैश्विक मंच पर स्थापित करने में लगे हैं।
अमेरिका के सहयोगी अब चीन के करीब
चीन की बढ़ती वैश्विक भूमिका का संकेत कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के हाल के दौरे और भाषण से मिलता है। कार्नी ने खुलेआम कहा कि “अंतर्राष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था की कहानी आंशिक रूप से झूठी थी,” और अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती दी। कनाडा ने चीन के साथ रणनीतिक साझेदारी पर सहमति जताई और चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर लागू किए गए कड़े टैरिफ में ढील दी।
ब्रिटेन और फ्रांस जैसे अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी भी चीन के साथ संबंध सुधारने में रुचि दिखा रहे हैं। ब्रिटिश सरकार ने लंदन में वित्तीय जिले के पास नए चीनी “मेगा” दूतावास के निर्माण को मंजूरी दी।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका के सहयोगियों का चीन की ओर रुख करना, ट्रंप प्रशासन की अस्थिर और द्विपक्षीय नीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। चीन इस अवसर का लाभ उठाकर वैश्विक शक्ति संतुलन में खुद को एक वैकल्पिक और भरोसेमंद नेता के रूप में स्थापित कर रहा है।