Wednesday, January 21

डिएगो गार्सिया बेस और चागोस द्वीप विवाद: ट्रंप ने कहा ‘बेवकूफी’, मॉरीशस ने दिया करारा जवाब

वॉशिंगटन/बीजिंग: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे और चागोस द्वीप समूह को लेकर ब्रिटेन पर निशाना साधा। उन्होंने ब्रिटेन के फैसले को “बहुत बड़ी बेवकूफी” करार दिया, जिसमें ब्रिटेन ने चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस को सौंपने पर सहमति जताई थी।

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चागोस द्वीप और डिएगो गार्सिया बेस क्या हैं?
चागोस द्वीप समूह मध्य हिंद महासागर में स्थित लगभग 60 द्वीपों का समूह है। इसका सबसे बड़ा द्वीप डिएगो गार्सिया है, जिस पर अमेरिका-ब्रिटेन का एक महत्वपूर्ण सैन्य बेस मौजूद है। यह बेस अमेरिकी नौसेना के जहाजों के लिए सर्विस स्टेशन और लंबी दूरी के बॉम्बर में ईंधन भरने के लिए अहम है। इसके अलावा, डिएगो गार्सिया का स्थान निगरानी और खुफिया जानकारी इकट्ठा करने के लिए भी अत्यंत रणनीतिक माना जाता है। यहाँ लगभग 4,000 अमेरिकी और ब्रिटिश सैन्य और नागरिक अधिकारी तैनात हैं।

1960 के दशक में ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया पर अमेरिका के साथ मिलकर सैन्य अड्डा बनाया और द्वीपसमूह के 55 से अधिक निवासियों को बाहर निकाल दिया। मॉरीशस ने 1968 में ब्रिटेन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद से इन द्वीपों पर अपना संप्रभुत्व जताया।

ब्रिटेनमॉरीशस समझौता
ब्रिटेन ने बढ़ते अंतर्राष्ट्रीय और कानूनी दबाव के चलते 2025 में चागोस द्वीप समूह मॉरीशस को सौंपने पर सहमति दी। संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च अदालत और अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय ने 1965 के ब्रिटेन के कदम को गैरकानूनी करार दिया था। समझौते के अनुसार, डिएगो गार्सिया पर अमेरिका और ब्रिटेन 99 वर्षों तक सैन्य अड्डा संचालित करेंगे, उसके बाद द्वीप मॉरीशस को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।

ट्रंप का बयान और मॉरीशस की प्रतिक्रिया
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ब्रिटेन का यह फैसला “बहुत बड़ी बेवकूफी का काम” है। उनका कहना था कि “हमारा शानदार NATO सहयोगी अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य अड्डे को मॉरीशस को देने की योजना बना रहा है।”

मॉरीशस ने ट्रंप के बयान का करारा जवाब देते हुए कहा कि चागोस द्वीपसमूह पर मॉरीशस की संप्रभुता अंतरराष्ट्रीय कानून द्वारा मान्यता प्राप्त है। अटॉर्नी जनरल गैविन ग्लोवर ने कहा, “यह समझौता केवल यूनाइटेड किंगडम और मॉरीशस के बीच बातचीत करके अंतिम रूप दिया गया है। ट्रंप के बयान से इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।”

विशेषज्ञ मानते हैं कि डिएगो गार्सिया और चागोस द्वीप का महत्व रणनीतिक और सैन्य दोनों दृष्टियों से बहुत बड़ा है। ट्रंप की प्रतिक्रिया इस बात का संकेत है कि अमेरिका अपनी हिंद महासागर में सैन्य पकड़ को लेकर संवेदनशील है।

 

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