
नई दिल्ली, 21 जनवरी 2026 – स्टेथोस्कोप, जो आज हर डॉक्टर की पहचान बन चुका है, का बिलकुल! आपके दिए गए कंटेंट को एक समाचार पत्र में प्रकाशित होने योग्य हिंदी समाचार के रूप में पेश कर रहा हूँ:
आविष्कार 1816 में हुआ था। इसे फ्रांसीसी फिजीशियन रेने लानेक (Rene Laennec) ने किया था। उस समय स्टेथोस्कोप का रूप वर्तमान मॉडल से काफी अलग था, और इसे बाद में लगभग 1861 के आसपास आधुनिक रूप दिया गया।
स्टेथोस्कोप के आविष्कार से पहले डॉक्टर मरीज की छाती पर सीधे कान लगाकर दिल की धड़कन और सांस की आवाज सुनते थे। यह कई बार असहजता का कारण बनता था, खासकर महिला मरीजों के मामलों में। यही वजह थी कि स्टेथोस्कोप का अविष्कार एक जरूरी चिकित्सा उपकरण के रूप में हुआ।
आज स्टेथोस्कोप केवल दिल की धड़कन सुनने के लिए ही नहीं, बल्कि फेफड़ों में व्हीजिंग और स्ट्रिडोर जैसी आवाजें, पेट में गड़गड़ाहट और आर्टरीज में रक्त प्रवाह की आवाज सुनने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
स्टेथोस्कोप के मुख्य प्रकार हैं:
- एनालॉग स्टेथोस्कोप
- इलेक्ट्रॉनिक स्टेथोस्कोप
- डिजिटल स्टेथोस्कोप
स्वास्थ्य से जुड़ी सामान्य जानकारी के लिए स्टेथोस्कोप एक महत्वपूर्ण उपकरण है, लेकिन किसी भी बीमारी के इलाज या दवा के लिए हमेशा योग्य डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।