
सीकर: राजस्थान की रेतीली और पानी-हीन धरती पर अगर कोई अनार और सेब की खेती कर दिखाए, तो इसे सचमुच चमत्कार ही कहा जाएगा। सीकर जिले के बेरी गांव की बेटी संतोष देवी ने 17 साल की मेहनत और जैविक खेती के दम पर बंजर जमीन को हरा-भरा कर दिखाया।
आज उनके खेतों में 800 ग्राम तक का अनार और 200 ग्राम तक का सेब पैदा होता है। उनकी इस उपलब्धि ने खेती को घाटे का व्यवसाय मानने वालों को भी चौंका दिया।
3,000 की कमाई से लाखों का टर्नओवर
संतोष देवी बताती हैं कि एक समय उनके पति की आय मात्र 3,000 रुपये थी। लेकिन आधुनिक बागवानी और मेहनत के दम पर आज उनका टर्नओवर लाखों रुपये में पहुंच गया है। वर्ष 2016-17 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने उन्हें 1 लाख रुपये के कृषि पुरस्कार से सम्मानित किया था। वे हर साल लगभग 80,000 पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रही हैं।
रसोई से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
भारत सरकार ने उन्हें 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस समारोह में बतौर विशिष्ट अतिथि आमंत्रित किया है। संतोष देवी कहती हैं, “महिलाओं को सिर्फ रसोई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मेरी मेहनत से हजारों महिलाएं बागवानी से जुड़ रही हैं।” उन्होंने अपने बेटे को भी कृषि विज्ञान की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया है, ताकि भविष्य में खेती और उन्नत बन सके।
गणतंत्र दिवस पर राजपथ पर उनकी उपस्थिति राजस्थान के लाखों किसानों और महिलाओं के लिए गौरव का पल होगी, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपनी किस्मत बदलने का जज्बा रखते हैं।