
नई दिल्ली।
26 जनवरी का दिन भारत के इतिहास में अत्यंत गौरवपूर्ण और प्रेरणादायक स्थान रखता है। इसी दिन वर्ष 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ और देश एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष तथा लोकतांत्रिक गणराज्य बना। गणतंत्र दिवस केवल राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि संविधान, लोकतंत्र और नागरिक जिम्मेदारियों का उत्सव है।
देशभर में गणतंत्र दिवस के अवसर पर सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं तथा सामाजिक संगठनों द्वारा विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। इन आयोजनों में भाषण प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, झंडारोहण और देशभक्ति कार्यक्रम प्रमुख रूप से शामिल होते हैं।
गणतंत्र दिवस हमें उन महान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान की याद दिलाता है, जिनके संघर्ष के कारण भारत आज स्वतंत्र और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में खड़ा है। साथ ही यह दिन संविधान निर्माताओं—विशेष रूप से डॉ. भीमराव अंबेडकर—के अमूल्य योगदान को नमन करने का अवसर भी प्रदान करता है, जिन्होंने न्याय, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे पर आधारित संविधान की नींव रखी।
विशेषज्ञों और शिक्षाविदों का मानना है कि गणतंत्र दिवस को केवल परेड देखने या तिरंगा फहराने तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। यह दिन हमें लोकतांत्रिक मूल्यों को आत्मसात करने, संविधान की मर्यादा बनाए रखने और देश की एकता एवं अखंडता के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देता है।
भारत की विविधता में एकता की पहचान को संविधान मजबूती प्रदान करता है। धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर सभी नागरिकों को समान अधिकार देना लोकतंत्र की सच्ची भावना है। गणतंत्र दिवस इसी भावना को जीवंत बनाए रखने का संदेश देता है।
इस अवसर पर नागरिकों से अपील की जाती है कि वे न केवल अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें, बल्कि अपने कर्तव्यों का भी पूरी निष्ठा से पालन करें। ईमानदारी, शिक्षा, परिश्रम और सामाजिक जिम्मेदारी को अपनाकर ही एक सशक्त और विकसित भारत का निर्माण संभव है।
गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशवासी यह संकल्प लें कि वे संविधान के आदर्शों का सम्मान करेंगे, राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाएंगे और भारत को प्रगति के पथ पर आगे ले जाने में अपना योगदान देंगे।
जय हिंद, जय भारत।
सभी देशवासियों को 26 जनवरी गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।