
आजकल मोबाइल फोन हर किसी की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। बच्चे और युवा घंटों तक फोन पर वीडियो देखते, गेम खेलते और सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हुए अपना समय गंवा देते हैं। इससे उनकी पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। कई बच्चे खुद समझते हैं कि वे मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं, पर उसे नियंत्रित नहीं कर पाते।
ऐसी ही एक समस्या लेकर हाल ही में एक बच्चा संत प्रेमानंद महाराज के पास पहुंचा। उसने बताया कि वह मोबाइल फोन देखना छोड़ना चाहता है, लेकिन मन नहीं मानता। संत प्रेमानंद महाराज ने उसे जो सलाह दी, वह न केवल बच्चों बल्कि बड़ों के लिए भी बेहद उपयोगी है।
संत प्रेमानंद महाराज का संदेश:
- आदत में सुधार जरूरी है:
महाराज ने बच्चे से पूछा कि वह कितनी देर मोबाइल इस्तेमाल करता है। बच्चा बोला कि मुश्किल से दो घंटे। महाराज ने समझाया कि यह आदत धीरे-धीरे बढ़कर समय की बर्बादी और गलत रास्तों की ओर ले जा सकती है। - मोबाइल पर भक्ति और ज्ञान संबंधी सामग्री देखें:
महाराज ने कहा, “मोबाइल पर केवल रामायण, महाभारत या संतवाणी जैसी सकारात्मक चीजें देखें। गंदी या गलत बातें कभी न देखें।” - खेल और वीडियो में समय बर्बाद न करें:
उन्होंने बच्चों को चेताया कि गेम खेलना और अनावश्यक वीडियो देखना समय की बर्बादी है। इसके बजाय बच्चे ‘राधा–राधा’ का नाम जप कर सकते हैं। - वादा कर आत्म–नियंत्रण बढ़ाएं:
महाराज ने बच्चे से हाथ जोड़कर पूछा, “क्या तुम वादा करते हो कि अब से राधा-राधा नाम का जप करोगे?” इस तरह बच्चे मानसिक रूप से सकारात्मक और नियंत्रित बने रहते हैं।
संदेश: मोबाइल फोन की आदत को सुधारना मुश्किल हो सकता है, लेकिन सही मार्गदर्शन और सकारात्मक आदतों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। बच्चों और युवाओं के लिए संत का यह उपाय बेहद सरल और प्रभावी साबित हो सकता है।