
नई दिल्ली।
भारतीय क्रिकेट के स्वर्णिम इतिहास में 20 जनवरी की तारीख खास मायने रखती है। इसी दिन, वर्ष 1980 में चेन्नई के ऐतिहासिक चेपॉक स्टेडियम (तत्कालीन मद्रास) में भारत ने अपने चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ ऐसी जीत दर्ज की थी, जिसने 27 वर्षों के लंबे इंतजार को खत्म कर दिया। इस ऐतिहासिक टेस्ट में सुनील गावस्कर और कपिल देव के अद्वितीय प्रदर्शन ने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दी।
गावस्कर की मैराथन पारी ने बदला मैच का रुख
इस मुकाबले के असली नायक ‘लिटिल मास्टर’ सुनील गावस्कर रहे। उन्होंने अदम्य धैर्य और तकनीकी श्रेष्ठता का परिचय देते हुए लगभग 10 घंटे तक क्रीज पर टिककर 166 रनों की यादगार पारी खेली। गावस्कर की इस मैराथन बल्लेबाजी ने न केवल पाकिस्तान के गेंदबाजों को पूरी तरह थका दिया, बल्कि भारत की जीत की नींव भी मजबूत कर दी।
कपिल देव का ऑलराउंड तूफान
गेंद और बल्ले दोनों से कमाल दिखाते हुए कपिल देव ने इस टेस्ट को हमेशा के लिए अपने नाम कर लिया। ‘हरियाणा हरिकेन’ के नाम से मशहूर कपिल ने मैच में 136 रन देकर 11 विकेट चटकाए, जिससे पाकिस्तान की बल्लेबाजी बिखर गई। इसके बाद बल्लेबाजी में भी उन्होंने 84 रनों की तेजतर्रार पारी खेलकर भारत को विशाल बढ़त दिलाई।
10 विकेट से जीत, इतिहास में दर्ज हुआ सुनहरा पल
गावस्कर और कपिल देव के शानदार प्रदर्शन के दम पर भारत ने यह मुकाबला 10 विकेट के बड़े अंतर से जीत लिया। इस जीत के साथ ही भारत ने छह मैचों की टेस्ट सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। यह क्षण भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए बेहद भावुक था, क्योंकि 1952 के बाद पहली बार भारत ने पाकिस्तान को टेस्ट सीरीज में शिकस्त दी थी।
भारतीय क्रिकेट की दिशा बदलने वाला मुकाबला
यह जीत सिर्फ एक टेस्ट मैच या सीरीज तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसने भारतीय क्रिकेट के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। चेपॉक में रचा गया यह इतिहास आज भी भारतीय क्रिकेट की प्रेरणादायक कहानियों में शुमार है।