Sunday, June 21

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चित्रकूट में बंदरों की रहस्यमयी मौत, वन विभाग ने किया पीएम, जहर या करंट की आशंका

सतना/चित्रकूट। मध्यप्रदेश–उत्तरप्रदेश सीमा पर स्थित प्रसिद्ध तीर्थ नगरी चित्रकूट में रहस्यमयी ढंग से दो दर्जन से अधिक बंदरों की मौत ने हड़कंप मचा दिया है। सड़क किनारे लगभग एक किलोमीटर तक बिखरे बंदरों के शव मिलने के बाद स्थानीय लोग और प्रशासन सकते में आ गए।

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वन विभाग की जांच

स्थानीय कुशवाहा बस्ती के पास सड़क किनारे दर्जनों बंदरों के शव पाए गए। इनमें से कुछ बंदर अभी भी जीवित पाए गए हैं। घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और मृत बंदरों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। शवों के साथ-साथ उनके बिसरे (अंत्येष्टि के लिए रखी गई सामग्री) को भी सुरक्षित रखा गया है ताकि लैब में मौत के कारणों की जांच की जा सके।

करंट या जहर की आशंका

वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने मृतकों की स्थिति का विश्लेषण किया है। शुरुआती जांच में यह दो संभावनाओं के इर्द-गिर्द केंद्रित है:

  1. करंट लगने से मौत—संभावना जताई जा रही है कि बंदरों की मौत किसी बिजली के झटके के कारण हुई हो।
  2. शरारती तत्वों द्वारा हत्या—दूसरी संभावना यह भी है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर बंदरों को जहर देकर मार डाला और शव सड़क किनारे फेंक दिया।

इस सिलसिले में आसपास के सीसीटीवी कैमरों की जांच की जा रही है ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि का पता लगाया जा सके।

भगवान की तपोभूमि में मौत से आक्रोश

चित्रकूट को भगवान श्रीराम की तपोस्थली माना जाता है और यहां हनुमान जी के प्रतीक माने जाने वाले बंदरों की सामूहिक मौत से स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। लोग इसे साधारण दुर्घटना मानने के बजाय किसी शरारती या आपराधिक हरकत का नतीजा मान रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

सोशल मीडिया में वायरल

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है, जिससे स्थानीय प्रशासन और वन विभाग पर दबाव बढ़ गया है। अधिकारी फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज का इंतजार कर रहे हैं, ताकि मौत की वास्तविक वजह सामने आ सके।

चित्रकूट के वन अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही मृतकों के कारणों की पुष्टि कर उचित कदम उठाए जाएंगे और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी और सुरक्षा बढ़ाई जाएगी।

 

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