
नई दिल्ली: भारत के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान की पहली अनक्रूड उड़ान इस साल मार्च से पहले होने की उम्मीद है। इस मिशन HLVM3 G1/OM1 में बिना दाब वाला (अनप्रेसराइज्ड) क्रू मॉड्यूल इस्तेमाल किया जाएगा। मिशन का मुख्य उद्देश्य मानव-रेटेड लॉन्च व्हीकल के जरिए अंतरिक्ष यान को लो अर्थ ऑर्बिट में भेजना, क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित री-एंट्री, समुद्र में स्प्लैशडाउन और मॉड्यूल की रिकवरी सुनिश्चित करना है।
मिशन में देरी की वजह:
गगनयान मिशन की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में लाल किले से की थी, तब लक्ष्य 2021 रखा गया था। लेकिन कोविड-19 महामारी, सप्लाई चेन बाधाएं और निर्माण संबंधी चुनौतियों के कारण मिशन में देरी हुई। इसके बाद कई तय समयसीमाएं भी पूरी नहीं हो सकीं।
ISRO की तैयारी और टेस्टिंग:
दिसंबर 2024 में गगनयान के लिए ऑफिशियल लॉन्च कैंपेन शुरू हुआ।
क्रू और सर्विस मॉड्यूल का एकीकरण, प्रोपल्शन सिस्टम और अन्य अहम सिस्टम जोड़ने का काम जनवरी 2025 तक पूरा हुआ।
क्रू एस्केप सिस्टम, थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम और 10-पैराशूट वाले रिकवरी सिस्टम का सफल परीक्षण किया गया।
ह्यूमन रेटिंग सर्टिफिकेशन बोर्ड (HRCB) ने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए जरूरी उपकरण जैसे इमरजेंसी सर्वाइवल किट, भोजन कंटेनर और डोज़ीमीटर प्रमाणित किए।
ISRO ने गगनयान एनालॉग एक्सपेरिमेंट (Gyanex) मिशनों की भी शुरुआत की है।
भविष्य की योजना:
गगनयान कार्यक्रम के तहत कुल आठ मिशनों की योजना है, जिसमें छह बिना चालक और दो मानवयुक्त मिशन शामिल हैं। पहली मानव उड़ान अब 2027 के अंत या 2028 की शुरुआत में संभावित है। इसके साथ ही ISRO ने अपने महत्वाकांक्षी लॉन्च कैलेंडर में PSLV, पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों और वाणिज्यिक SSLV मिशन को भी शामिल किया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गगनयान का यह पहला मिशन भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा और इसके सफल होने से मानवयुक्त उड़ानों की राह और आसान हो जाएगी।