Saturday, January 3

कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन का स्पष्ट संदेश: लोकतंत्र की कीमत पर विकास नहीं हो सकता

 

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नई दिल्ली: मोदी सरकार की बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में तेजी लाने की कोशिशों के बीच कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन ने शुक्रवार को अहम बयान दिया। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं को लागू करते समय लोकतंत्र और लोगों की सहमति सर्वोपरि हैं। भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव की मांग के बीच सोमनाथन ने स्पष्ट किया कि सरकार सिर्फ जन-सहमति और पब्लिक कंसल्टेशन के बाद ही प्रोजेक्ट्स लागू करना चाहती है।

 

सोमनाथन ने बताया कि बड़ी परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण और वन्यजीवों से संबंधित मंजूरियों में समय लगता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले ‘प्रगति’ प्लेटफॉर्म ने इन रुकावटों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 

भूमि अधिग्रहण और वन मंजूरियों में तेजी:

 

मल्टी-लेयर प्रगति के तहत उठाए गए 7,735 मुद्दों में से 35% भूमि अधिग्रहण से और 20% वन्यजीव/वन मंजूरी से संबंधित थे।

वन और वन्यजीव मंजूरी का औसत समय 600 दिनों से घटकर 75 दिन हो गया।

प्रगति के तहत पीएम की 50 मीटिंग्स में 382 प्रोजेक्ट्स का रिव्यू किया गया, जिनमें सड़क, रेलवे और पावर सेक्टर प्रमुख थे।

 

सोमनाथन ने जम्मू-उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक का उदाहरण देते हुए बताया कि यह परियोजना 1994 में मंज़ूरी के बाद 2015 तक सिर्फ 40% पूरी हुई थी, लेकिन प्रगति प्लेटफॉर्म के तहत उच्चस्तरीय निगरानी के बाद इसे जून 2025 में चालू किया गया, अन्यथा यह 2038 तक पूरी होती।

 

मुख्य सचिवों और राज्यों का योगदान:

सोमनाथन ने कहा कि सभी राज्यों के मुख्य सचिव और सरकार की टीमों ने रुकावटों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। प्रगति प्लेटफॉर्म ने न केवल प्रोजेक्ट्स, बल्कि 61 सरकारी योजनाओं और 36 सेक्टरों में शिकायतों की समीक्षा में भी मदद की।

 

कैबिनेट सचिव ने दोहराया कि सरकार की नीति स्पष्ट है: तेजी से विकास आवश्यक है, लेकिन लोकतंत्र और जनमत की कीमत पर कोई परियोजना लागू नहीं होगी।

 

 

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