
पटना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर चलाए गए ‘गिव इट अप’ अभियान का असर अब बिहार में भी बड़े पैमाने पर दिखाई दे रहा है। प्रदेश के मध्यम और उच्च वर्ग के लाखों परिवारों ने स्वेच्छा से एलपीजी गैस सब्सिडी छोड़कर एक मिसाल पेश की है, ताकि इसका लाभ उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को मिल सके।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में अब तक 21 लाख 60 हजार उपभोक्ताओं ने अपनी सब्सिडी सरेंडर की है। यह संख्या राज्य के शहरी इलाकों, खासकर पटना, गया और मुजफ्फरपुर में सबसे अधिक देखी गई है।
एलपीजी सब्सिडी छोड़ने के मामले में बिहार देश के शीर्ष 10 राज्यों में शामिल है। इस सूची में महाराष्ट्र पहले और उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर हैं, जबकि बिहार 10वें पायदान पर है। यह उपलब्धि इस मायने में भी महत्वपूर्ण है कि बिहार एक विकासशील राज्य होते हुए भी राष्ट्रीय हित में इस तरह की जिम्मेदारी और जागरूकता दिखा रहा है।
उज्ज्वला योजना को मिला नया बल
बिहार में छोड़ी गई सब्सिडी का सीधा लाभ ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा है। ‘ज्ञान की भूमि’ से छोड़ी गई इस राशि की मदद से अब तक 1 करोड़ 16 लाख से अधिक उज्ज्वला कनेक्शन दिए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2026 तक हर घर में धुआं मुक्त रसोई सुनिश्चित की जा सके, जिसमें इन जागरूक नागरिकों का बड़ा योगदान है।