Friday, January 2

भारतीय महिला हॉकी को फिर मिला ‘मैरिन टच’, शुअर्ड मरीन की वापसी से नई उम्मीदें

 

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भारतीय महिला हॉकी टीम को एक बार फिर वही अनुभवी मार्गदर्शक मिल गया है, जिसकी कोचिंग में टीम ने इतिहास रचा था। हॉकी इंडिया ने डच कोच शुअर्ड मरीन (Sjoerd Marijne) को दोबारा भारतीय महिला हॉकी टीम का चीफ कोच नियुक्त करने की घोषणा की है। मरीन वही नाम हैं, जिनके नेतृत्व में भारतीय महिला टीम ने 36 साल बाद ओलंपिक में धमाकेदार वापसी की थी और टोक्यो ओलंपिक-2020 में चौथे स्थान तक पहुंचकर पूरी दुनिया का ध्यान खींचा था।

 

4.5 साल बाद वापसी, नई ऊर्जा और स्पष्ट विजन

 

हॉकी इंडिया की ओर से जारी आधिकारिक बयान में शुअर्ड मरीन ने कहा,

“4.5 साल बाद भारत लौटकर अच्छा लग रहा है। मैं नई ऊर्जा और स्पष्ट विजन के साथ वापस आया हूं। मेरा लक्ष्य खिलाड़ियों को वैश्विक मंच पर उनकी पूरी क्षमता तक पहुंचने में मदद करना है।”

हॉकी इंडिया को उम्मीद है कि मरीन एक बार फिर टीम में वही आत्मविश्वास, फिटनेस और आक्रामक खेल का जज्बा भरेंगे, जिसने टोक्यो में इतिहास रचने की नींव रखी थी।

 

डॉ. वेन लोम्बार्ड की भी वापसी

 

मरीन के साथ-साथ डॉ. वेन लोम्बार्ड को भी महिला हॉकी टीम का साइंटिफिक एडवाइजर और हेड ऑफ एथलीट परफॉर्मेंस नियुक्त किया गया है। लोम्बार्ड पहले भी टीम से जुड़े रह चुके हैं और खिलाड़ियों की फिजिकल फिटनेस और परफॉर्मेंस ट्रांसफॉर्मेशन में उनकी भूमिका बेहद अहम रही है। उनकी देखरेख में ही भारतीय महिला टीम ने टोक्यो ओलंपिक में कई दिग्गज टीमों को शिकस्त दी थी।

 

कौन हैं शुअर्ड मरीन?

 

शुअर्ड मरीन को पहली बार 2017 में भारतीय महिला हॉकी टीम का कोच बनाया गया था। कुछ समय के अंतराल के बाद वे दोबारा इस भूमिका में लौटे और उनके कार्यकाल में टीम ने 36 साल बाद महज दूसरी बार ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया।

टोक्यो ओलंपिक-2020 में भारतीय महिला टीम का सेमीफाइनल तक पहुंचना अब तक का सर्वश्रेष्ठ ओलंपिक प्रदर्शन रहा। कांस्य पदक मुकाबले में इंग्लैंड से 3-4 की करीबी हार ने भले ही पदक का सपना तोड़ा, लेकिन टीम ने अपने जुझारूपन से करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया।

 

अंतरराष्ट्रीय अनुभव से भरपूर कोच

 

नीदरलैंड्स के पूर्व हॉकी खिलाड़ी शुअर्ड मरीन, दुनिया की शीर्ष डच हॉकी लीग ‘हूफ्डक्लासे’ में डेन बॉस्क क्लब के लिए खेल चुके हैं। वे नीदरलैंड्स की महिला हॉकी टीम और पुरुष अंडर-21 टीम के कोच भी रह चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव भारतीय टीम के लिए एक बार फिर संजीवनी साबित हो सकता है।

 

फिर दोहराएंगे टोक्यो जैसा चमत्कार?

 

शुअर्ड मरीन की वापसी से भारतीय महिला हॉकी में नई उम्मीदें जगी हैं। हॉकी इंडिया और देशभर के खेल प्रेमियों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या मरीन एक बार फिर टीम को ओलंपिक पोडियम तक पहुंचाने का सपना साकार कर पाएंगे।

इतिहास गवाह है—जब मरीन भारतीय महिला हॉकी के साथ होते हैं, तो टीम सिर्फ खेलती नहीं, लड़ती है और इतिहास रचती है।

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