बिहार में बेरोजगारी के आंकड़ों में गिरावट — लेकिन हकीकत में क्यों नहीं दिख रहा असर?
पटना : बिहार विधानसभा चुनाव के बीच बेरोजगारी का मुद्दा इस बार लगभग गायब है, जबकि यह राज्य की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक रही है। सत्ता पक्ष लगातार दावा कर रहा है कि बिहार में बेरोजगारी की दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य की बेरोजगारी दर 2017-18 के 8% से घटकर 2023-24 में 3% तक पहुंच गई है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है — “गिरावट सिर्फ आंकड़ों में है, हकीकत में नहीं।”
📊 आंकड़े कुछ कहते हैं, हकीकत कुछ और
पहली नजर में यह आंकड़े राहत भरे लगते हैं, मगर असल तस्वीर उतनी उजली नहीं है। बिहार की बेरोजगारी दर भले कम हुई हो, पर राज्य में रोजगार की गुणवत्ता बेहद कमजोर है। यहां अधिकतर नौकरियां अस्थायी और अनौपचारिक हैं — यानी जिनमें न तो स्थिर वेतन है, न सामाजिक सुरक्षा।
💼 स्थायी नौकरियों का संकट
बिहार में “नियमित वेतनभोगी” नौकरियों की हिस्सेदारी बेहद कम है।महामार...









