पुणे की 17 करोड़ की धोखाधड़ी का मास्टरमाइंड 12 साल बाद CBI के हाथ आया, झूठी पहचान और पासपोर्ट का जाल फटा
नई दिल्ली: पुणे की इंडियन ओवरसीज बैंक को 2013 में कथित तौर पर 17 करोड़ रुपये का चूना लगाने वाले आशुतोष पंडित 12 साल तक अदृश्य होकर रह गए। 'हाउस ऑफ लैपटॉप्स' कंपनी के डायरेक्टर पंडित ने अचानक गायब होकर गोवा में नया जीवन शुरू कर लिया। CBI ने इस केस की जांच संभालते हुए उसे भगोड़ा घोषित किया गया पाया।
जाली पहचान और पासपोर्ट का जाल:पंडित ने अपने नए जीवन के लिए यतिन शर्मा नाम से PAN, आधार और पासपोर्ट बनवाए। जब एक पासपोर्ट की अवधि खत्म हुई, तो उसने दिल्ली और गोवा से नए पासपोर्ट हासिल किए। इन जाली दस्तावेजों ने उसे 12 साल तक कानूनी कार्रवाई से बचाया और एक नया जीवन बनाने का मौका दिया।
कैसे फटा जाल:CBI को अंततः सफलता NATGRID (नेशनल इंटेलिजेंस ग्रिड) के डिजिटल डेटा विश्लेषण से मिली। डेटा पैटर्न में छोटी विसंगतियों को पहचानकर जांचकर्ताओं ने तकनीकी सबूतों के साथ मिलाया। यतिन शर्मा का मुखौटा टूट ग...










