
नई दिल्ली: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले के आरोपी हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को बेल्जियम से बड़ा झटका लगा है। बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने चोकसी की भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि चोकसी के तर्कों में कोई दम नहीं है और प्रत्यर्पण प्रक्रिया भारत के कानूनों और यूरोपीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप है। इससे भगोड़े चोकसी का भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ हो गया है।
चोकसी की तीन मुख्य दलीलों को ठुकराया
चोकसी ने अपनी अपील में तीन मुख्य दलीलें पेश की थीं:
- निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन
- अपहरण का आरोप
- भारत की जेलों में कैद की खराब स्थिति की आशंकाएं
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इन दलीलों में कोई तथ्यात्मक या कानूनी आधार नहीं है। चोकसी का यह भी दावा था कि शुरुआत में कुछ दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, जिससे उनके बचाव के अधिकार प्रभावित हुए, लेकिन कोर्ट ने इसे भी खारिज कर दिया।
अगवा करने के आरोप पर कोर्ट ने कहा ‘बिना आधार’
चोकसी ने दावा किया कि उन्हें एंटीगुआ से भारतीय अधिकारियों की मदद से अगवा किया गया था। कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज कर दिया और कहा कि निचली अदालत ने सबूतों का सावधानीपूर्वक मूल्यांकन किया था।
भारत में सुरक्षित कैद का भरोसा
भारत सरकार ने बेल्जियम को आश्वासन दिया कि चोकसी को मुंबई की आर्थर रोड जेल के सुरक्षित वार्ड में रखा जाएगा। इस वार्ड में दो सेल और निजी शौचालय की सुविधा होगी और न्यायिक अदालतों के अधिकार क्षेत्र में उनका निवास सुनिश्चित किया जाएगा।
13 हजार करोड़ के घोटाले का मामला
चोकसी जनवरी 2018 में भारत से फरार हो गया था, जिसके कुछ ही दिन बाद PNB घोटाले का खुलासा हुआ। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के अनुसार, 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले में अकेले चोकसी ने 6,400 करोड़ रुपये की हेराफेरी की।
विशेषज्ञों का कहना है, बेल्जियम सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारत को न्याय दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा और चोकसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई अब और तेज़ होगी।