आजादी की शान, देश का मान: वन्दे मातरम् के छह छंद, 3 मिनट 10 सेकंड में बजाना अनिवार्य
नई दिल्ली: भारत का राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् देशभक्ति और आजादी की लड़ाई का प्रतीक रहा है। इसे कवि और उपन्यासकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था। यह गीत पहली बार 1896 में कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में गाया गया, यानी भारत को स्वतंत्रता मिलने से करीब 51 साल पहले। स्वतंत्रता संग्राम में वन्दे मातरम् ने लोगों को प्रेरित करने और अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
रवीन्द्रनाथ टैगोर ने इसे स्वरबद्ध किया, जिससे यह गीत हर भारतीय के गर्व का प्रतीक बन गया।
केंद्र सरकार ने अब आधिकारिक कार्यक्रमों में वन्दे मातरम् के छह अंतरा वाले संस्करण को बजाना या गाना अनिवार्य कर दिया है। निर्धारित समय 3 मिनट 10 सेकंड होना चाहिए।
वन्दे मातरम् के छह छंद:
छंद 1:वन्दे मातरम्।सुजलां सुफलां मलयजशीतलाम्।शस्यशामलां मातरम्।शुभ्रज्योत्स्नापुलकितयामिनीं।फुल्लकुसुमितद्रुमदलशोभिनीं।सुहासिनीं सुमधुर ...










