Monday, April 6

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फ्रेंच भाषा सीखकर कनाडा में जॉब करें और आसानी से पाएं PR, सरकार दे रही हजारों स्लॉट्स
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फ्रेंच भाषा सीखकर कनाडा में जॉब करें और आसानी से पाएं PR, सरकार दे रही हजारों स्लॉट्स

कनाडा में परमानेंट रेजिडेंसी (PR) पाने की चाह रखने वाले विदेशियों के लिए बड़ी खबर है। अगर आप कनाडा में जॉब करने जा रहे हैं और फ्रेंच भाषा जानते हैं, तो 2026 में आपकी PR पाने की संभावना और बढ़ जाएगी। कनाडा सरकार ने फ्रेंच भाषी लोगों के लिए 5000 PR स्लॉट्स रिजर्व किए हैं। इसका उद्देश्य क्यूबेक के अलावा अन्य राज्यों में फ्रेंच भाषी आबादी बढ़ाना है। IRCC (Immigration, Refugees and Citizenship Canada) के अनुसार, ये स्लॉट्स फेडरल एक्सप्रेस एंट्री प्रोग्राम और राज्यों द्वारा PR के लिए नामित वर्कर्स दोनों के लिए उपलब्ध होंगे। क्यों है फ्रेंच भाषियों के लिए आसान PR? कनाडा में कुछ क्षेत्रों में वर्कर्स की कमी है और विशेष स्किल वाले वर्कर्स की मांग अधिक है। ऐसे में फ्रेंच भाषा जानने वाले विदेशियों को आसानी से PR मिलने का रास्ता खुल जाता है। अंग्रेजी भाषी उम्मीदवारों के मुकाबले फ्रेंच भाषियों की प्र...
हाथ से छिन सकता है ग्रीन कार्ड! अमेरिका जाने वालों को इमिग्रेशन वकील की चेतावनी: ये 10 गलतियां न करें
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हाथ से छिन सकता है ग्रीन कार्ड! अमेरिका जाने वालों को इमिग्रेशन वकील की चेतावनी: ये 10 गलतियां न करें

अमेरिका में ग्रीन कार्ड मिलने का मतलब है वहां स्थायी रूप से रहने और काम करने की इजाजत। यह ग्रीन कार्ड विदेशियों को अमेरिका में स्थायी तौर पर बसने, किसी भी राज्य में रहने और भविष्य में नागरिकता लेने का अवसर देता है। लेकिन इसके साथ कुछ नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है, वरना ग्रीन कार्ड रद्द भी किया जा सकता है। इमिग्रेशन वकील मोमिता रहमान ने हाल ही में एक यूट्यूब वीडियो में ग्रीन कार्ड होल्डर्स द्वारा की जाने वाली 10 आम गलतियों के बारे में चेतावनी दी है, जिनसे यह अधिकार खो सकता है। लंबे समय तक अमेरिका से बाहर रहना ग्रीन कार्ड होल्डर को अमेरिका से बाहर जाने की अनुमति है, लेकिन छह महीने से अधिक समय तक बाहर रहने पर यह माना जाता है कि उसने अपनी रेजिडेंसी छोड़ दी। इसलिए ग्रीन कार्ड होल्डर को साल में कम से कम 9-10 महीने अमेरिका में रहना चाहिए। अमेरिका से पर्याप्त संबंध न होना ग्रीन कार्...
अमेरिका का ग्रीनलैंड पर नजर: 3 बड़ी वजहें जो बना रही है ये भू-राजनीतिक संघर्ष
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अमेरिका का ग्रीनलैंड पर नजर: 3 बड़ी वजहें जो बना रही है ये भू-राजनीतिक संघर्ष

अमेरिका ने हाल ही में ग्रीनलैंड पर अपनी पकड़ बढ़ाने की इच्छा जताई है, जिससे दुनिया के कई देशों, खासतौर पर यूरोप में हलचल मच गई है। डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार ज़ोर देकर कहा है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से अहम है। ग्रीनलैंड का राजनीतिक और भौगोलिक महत्व ग्रीनलैंड अटलांटिक महासागर में स्थित दुनिया के सबसे बड़े द्वीपों में से एक है। यह पिछले 300 सालों से डेनमार्क का हिस्सा रहा है। 1979 में इसे स्वायत्ता दी गई, जिसमें ग्रीनलैंड को आंतरिक मामलों में निर्णय लेने का अधिकार मिला, लेकिन विदेश नीति, रक्षा और आर्थिक मामलों का नियंत्रण अभी भी डेनमार्क के पास है। नाटो के सदस्य होने के कारण, ग्रीनलैंड को सुरक्षा का आश्वासन भी मिला है। ग्रीनलैंड की आबादी लगभग 57 हजार है, जिसमें अधिकांश मूलनिवासी हैं। यहां की प्रति व्यक्ति जीडीपी 58,499 अमेर...
15 साल की Sick Leave पर सैलरी के लिए IT कर्मचारी कोर्ट पहुंचा, जानें भारत और विदेश के नियम
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15 साल की Sick Leave पर सैलरी के लिए IT कर्मचारी कोर्ट पहुंचा, जानें भारत और विदेश के नियम

नई दिल्ली: अक्सर कर्मचारियों की छुट्टी और सैलरी को लेकर विवाद सुनने में आते हैं, लेकिन ब्रिटेन में एक मामला ऐसा सामने आया जो अद्वितीय है। आईबीएम कंपनी का इयान क्लिफोर्ड नामक कर्मचारी करीब 15 साल की बीमारी (Sick Leave) में रहने के बावजूद कोर्ट पहुंच गया, क्योंकि उसे इस दौरान सैलरी इंक्रीमेंट नहीं मिला। मामला क्या है? इयान ने 2008 में मानसिक स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी ली थी। बाद में यह बीमारी गंभीर निकली। शुरुआती पांच साल तक उसे कंपनी से वेतन नहीं मिला। 2013 में समझौते के तहत कंपनी ने उसे सालाना 75% सैलरी देने का फैसला किया, जो भारतीय रुपये में करीब 54 लाख रुपये प्रति वर्ष थी। इसे आजीवन मिलता रहना तय हुआ, लेकिन इयान को यह पर्याप्त नहीं लगा और 2022 में उसने सैलरी इंक्रीमेंट की मांग को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट का फैसला कोर्ट ने इस मामले को खारिज कर दिया। फैसला देते हुए कोर्ट ने कह...
21 जनवरी: आजादी के 25 साल बाद भारत को मिले त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय राज्य
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21 जनवरी: आजादी के 25 साल बाद भारत को मिले त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय राज्य

नई दिल्ली: भारत को 15 अगस्त 1947 को आजादी मिली थी, लेकिन 21 जनवरी का दिन भी भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है। इस दिन 1972 में आजादी के लगभग 25 साल बाद, त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय को पूर्ण राज्य का दर्जा मिला। तब से हर साल इन तीनों राज्यों का राज्य स्थापना दिवस मनाया जाता है। यह जानकारी UPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। आजादी के बाद राज्यों का गठन पीआईबी और सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, 21 जनवरी 1972 को नॉर्थ ईस्टर्न रीजन री-ऑर्गेनाइजेशन एक्ट-1971 (NEA-(R) Act, 1971) के तहत त्रिपुरा, मणिपुर और मेघालय को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया। इससे पहले मेघालय असम का हिस्सा था, जबकि त्रिपुरा और मणिपुर केंद्र शासित प्रदेश थे। मणिपुर की राज्य बनने की कहानी मणिपुर 1947 से पहले एक स्वतंत्र रियासत था। महाराजा बोधचंद्र सिंह ने भारत सरकार के साथ ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’...
RRB Group D Vacancy 2026: रेलवे की 22,000 वैकेंसी की आवेदन प्रक्रिया स्थगित, अब 31 जनवरी से शुरू
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RRB Group D Vacancy 2026: रेलवे की 22,000 वैकेंसी की आवेदन प्रक्रिया स्थगित, अब 31 जनवरी से शुरू

नई दिल्ली: रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने ग्रुप डी भर्ती 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है। पहले यह प्रक्रिया 21 जनवरी 2026 से शुरू होने वाली थी, लेकिन अब नए शेड्यूल के अनुसार 31 जनवरी 2026 से ऑनलाइन आवेदन शुरू होंगे। आवेदन की आखिरी तारीख 2 मार्च 2026 (रात 11.59 बजे) होगी। भर्ती का विवरण कुल वैकेंसी: लगभग 22,000 सबसे ज्यादा रिक्तियां इंजीनियरिंग विभाग में: 12,500 पद प्रमुख पद: ट्रैक मेंटेनर ग्रेड-4 (11,000 पद), असिस्टेंट (S&T) 1,500, असिस्टेंट (C&W) 1,000, असिस्टेंट (TRD) 800, असिस्टेंट (ट्रैक मशीन) 600, असिस्टेंट (ब्रिज) 600, असिस्टेंट (P-Way) 300, असिस्टेंट ऑपरेशन 500, असिस्टेंट लोको शेड 200 क्षेत्रवार आवंटन: पूर्वी मध्य रेलवे 993 पद, दक्षिण पूर्वी रेलवे 1,199 पद योग्यता और आयु सीमा शैक्षणिक योग्यता: नोटिफिकेशन में जल्द जारी की जाएगी; ITI या ...
CBSE ने बदला नियम: 12वीं तक हर स्कूल में अब अनिवार्य होगा काउंसलर और वेलनेस टीचर
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CBSE ने बदला नियम: 12वीं तक हर स्कूल में अब अनिवार्य होगा काउंसलर और वेलनेस टीचर

नई दिल्ली: सीबीएसई ने अपने सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए नया नियम लागू कर दिया है। अब हर सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूल में काउंसलिंग और वेलनेस टीचर के साथ-साथ करियर काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी। बोर्ड ने इसके लिए अपने एफिलिएशन बायलॉज 2018 में संशोधन किया है। नए नियम का मकसद यह कदम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, करियर योजना और व्यक्तिगत विकास को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है। नए नियम के तहत छात्रों को करियर चुनने, मानसिक तनाव कम करने और इमोशनल लेवल पर खुद को संभालने में मदद मिलेगी। स्टूडेंट-काउंसलर अनुपात और भूमिकाएं प्रत्येक 500 छात्रों पर एक काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी (रिशियो 1:500)। दो अलग भूमिकाएं तय की गई हैं: काउंसलिंग और वेलनेस टीचर (सोशियो-इमोशनल काउंसलर) करियर काउंसलर काउंसलिंग और वेलनेस टीचर की योग्यता साइकोलॉजी (क्लिनिकल/काउंसलि...
DSSSB Result 2026: म्यूजिक टीचर, ड्राफ्ट्समैन और फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा के नतीजे जारी
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DSSSB Result 2026: म्यूजिक टीचर, ड्राफ्ट्समैन और फार्मासिस्ट भर्ती परीक्षा के नतीजे जारी

दिल्ली: दिल्ली सबोर्डिनेट सर्विस सेलेक्शन बोर्ड (DSSSB) ने म्यूजिक टीचर, ड्राफ्ट्समैन और फार्मासिस्ट पदों की भर्ती परीक्षा के नतीजे जारी कर दिए हैं। जो उम्मीदवार इन परीक्षाओं में बैठे थे, वे डीएसएसएसबी की आधिकारिक वेबसाइट dsssb.delhi.gov.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। चयनित उम्मीदवारों को ई-डोजियर प्रक्रिया के दौरान डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन करवाना होगा। वैकेंसी और शॉर्टलिस्ट की जानकारी म्यूजिक टीचर: कुल 182 पदों के लिए 397 उम्मीदवार शॉर्टलिस्ट। ड्राफ्ट्समैन: कुल 5 पदों के लिए 122 उम्मीदवार टीयर-1 परीक्षा में उपस्थित। फार्मासिस्ट: कुल 2 पदों के लिए 380 उम्मीदवार टीयर-1 परीक्षा में बैठे। रिजल्ट चेक करने की प्रक्रिया सबसे पहले DSSSB की आधिकारिक वेबसाइट dsssb.delhi.gov.in पर जाएं। होमपेज पर Results सेक्शन में क्लिक करें। ई-डोजियर नोटिस PDF लिंक पर क्लिक करे...
बीड़ी बनाने वाली मां और बस कंडक्टर पिता की बेटी बनी IPS, इन्बा की कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा
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बीड़ी बनाने वाली मां और बस कंडक्टर पिता की बेटी बनी IPS, इन्बा की कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा

तमिलनाडु के कोयंबटूर की 25 वर्षीय एस. इन्बा ने गरीबी और कठिनाइयों को मात देकर IPS बन अपने परिवार और खुद का मान बढ़ाया है। उनकी सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि उन सभी लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं। गरीबी के बावजूद अडिग सपना एस. इन्बा तेनकासी जिले के सेंगोट्टई की रहने वाली हैं। उनकी मां एक फैक्ट्री में बीड़ी बनाती हैं और पिता श्रीनिवासन बस कंडक्टर हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद इन्बा ने हमेशा सरकारी नौकरी का सपना देखा और इसके लिए कड़ी मेहनत की। भाई की प्रेरणा और सहयोग इन्बा की सफलता के पीछे उनके भाई बालामुरली का योगदान भी अहम रहा। उन्होंने न केवल प्रेरित किया, बल्कि UPSC की तैयारी में होने वाले खर्च का ज्यादातर भार भी उठाया। बालामुरली सऊदी अरब में एक गैस कंपनी में काम कर रहे हैं और डिप्लोमा धारक हैं। शिक्षा और तैयारी का संघर्ष...
ब्रिटेन में नौकरी कर रही भारतीय महिला ने बताया अलग वर्क-कल्चर, मैनेजर खुद छुट्टी लेने के लिए कहते हैं
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ब्रिटेन में नौकरी कर रही भारतीय महिला ने बताया अलग वर्क-कल्चर, मैनेजर खुद छुट्टी लेने के लिए कहते हैं

लंदन। विदेश में काम कर रहे भारतीय कर्मचारियों के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस हमेशा एक बड़ी वजह रही है। ब्रिटेन की एक टेक कंपनी में कार्यरत भारतीय महिला मोधुरा रॉय ने भारत और ब्रिटेन के वर्क-कल्चर के बीच गहरा अंतर बताते हुए कहा कि वहां कर्मचारियों की सेहत और जीवन को प्राथमिकता दी जाती है। मोधुरा रॉय ने मनीकंट्रोल को बताया, "ब्रिटेन में नौकरी को जीवन का एक हिस्सा माना जाता है, न कि हर घंटे किए जाने वाले काम के रूप में। यहां हेल्थ, फिटनेस, छुट्टियां और परिवार के साथ समय बिताने पर ज्यादा फोकस रहता है। इस अप्रोच की वजह से मैं ऑफिस और घर दोनों जगह बेहतर ढंग से जीवन जी पा रही हूं।" काम की क्वालिटी पर जोर कोलकाता और पुणे में 7.5 साल काम करने के बाद मार्च 2020 में लंदन आईं मोधुरा ने कहा कि ब्रिटिश और ऑस्ट्रेलियाई मैनेजर्स काम की क्वालिटी, प्रोफेशनल विकास और क्लाइंट वैल्यू पर अधिक ध्यान देते हैं। उन्हों...