Tuesday, January 20

बीड़ी बनाने वाली मां और बस कंडक्टर पिता की बेटी बनी IPS, इन्बा की कहानी हर युवा के लिए प्रेरणा

तमिलनाडु के कोयंबटूर की 25 वर्षीय एस. इन्बा ने गरीबी और कठिनाइयों को मात देकर IPS बन अपने परिवार और खुद का मान बढ़ाया है। उनकी सफलता न केवल उनके परिवार के लिए गर्व की बात है, बल्कि उन सभी लड़कियों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखती हैं।

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गरीबी के बावजूद अडिग सपना
एस. इन्बा तेनकासी जिले के सेंगोट्टई की रहने वाली हैं। उनकी मां एक फैक्ट्री में बीड़ी बनाती हैं और पिता श्रीनिवासन बस कंडक्टर हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद इन्बा ने हमेशा सरकारी नौकरी का सपना देखा और इसके लिए कड़ी मेहनत की।

भाई की प्रेरणा और सहयोग
इन्बा की सफलता के पीछे उनके भाई बालामुरली का योगदान भी अहम रहा। उन्होंने न केवल प्रेरित किया, बल्कि UPSC की तैयारी में होने वाले खर्च का ज्यादातर भार भी उठाया। बालामुरली सऊदी अरब में एक गैस कंपनी में काम कर रहे हैं और डिप्लोमा धारक हैं।

शिक्षा और तैयारी का संघर्ष
इन्बा ने 2020 में कोयंबटूर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (CIT) से BE कंप्यूटर साइंस की डिग्री प्राप्त की। कॉलेज के बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। सेंगोट्टई की सरकारी पब्लिक लाइब्रेरी उनके लिए दो साल तक दूसरा घर बनी, जहां उन्होंने दिन-रात पढ़ाई की और ऑनलाइन क्लासेस भी लीं।

सरकारी योजना से मिली मदद
दो बार असफल होने के बाद भी इन्बा ने हार नहीं मानी। 2023 में उन्हें तमिलनाडु सरकार की ‘नान मुधलवन योजना’ के बारे में पता चला, जिसने गरीब लड़कियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए वित्तीय मदद दी। इस योजना से मिली 25,000 रुपये और मासिक 7,500 रुपये की सहायता ने उन्हें चेन्नई में पढ़ाई जारी रखने में मदद की।

तीसरे प्रयास में मिली सफलता
तीसरे प्रयास में इन्बा ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 क्रैक की और 851वीं ऑल इंडिया रैंक हासिल की। IAS कैडर के लिए यह रैंक पर्याप्त नहीं थी, लेकिन इन्बा ने IPS का चयन किया। वे वर्तमान में कोयंबटूर में एसएसपी की ट्रेनिंग ले रही हैं और भविष्य में IAS अधिकारी बनने का सपना भी देख रही हैं।

एस. इन्बा की कहानी साबित करती है कि अगर जूनून और इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं।

 

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