Wednesday, February 11

15 साल की Sick Leave पर सैलरी के लिए IT कर्मचारी कोर्ट पहुंचा, जानें भारत और विदेश के नियम

नई दिल्ली: अक्सर कर्मचारियों की छुट्टी और सैलरी को लेकर विवाद सुनने में आते हैं, लेकिन ब्रिटेन में एक मामला ऐसा सामने आया जो अद्वितीय है। आईबीएम कंपनी का इयान क्लिफोर्ड नामक कर्मचारी करीब 15 साल की बीमारी (Sick Leave) में रहने के बावजूद कोर्ट पहुंच गया, क्योंकि उसे इस दौरान सैलरी इंक्रीमेंट नहीं मिला।

This slideshow requires JavaScript.

मामला क्या है?
इयान ने 2008 में मानसिक स्वास्थ्य कारणों से छुट्टी ली थी। बाद में यह बीमारी गंभीर निकली। शुरुआती पांच साल तक उसे कंपनी से वेतन नहीं मिला। 2013 में समझौते के तहत कंपनी ने उसे सालाना 75% सैलरी देने का फैसला किया, जो भारतीय रुपये में करीब 54 लाख रुपये प्रति वर्ष थी। इसे आजीवन मिलता रहना तय हुआ, लेकिन इयान को यह पर्याप्त नहीं लगा और 2022 में उसने सैलरी इंक्रीमेंट की मांग को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

कोर्ट का फैसला
कोर्ट ने इस मामले को खारिज कर दिया। फैसला देते हुए कोर्ट ने कहा कि पहले ही आजीवन सैलरी मिलना बहुत बड़ा लाभ है, इसलिए बढ़ती महंगाई के हिसाब से इंक्रीमेंट की मांग पर दिव्यांगता भेदभाव का दावा नहीं किया जा सकता।

भारत में Sick Leave और सैलरी के नियम
भारत में सरकारी कर्मचारियों को सेंट्रल सिविल सर्विसेज नियम 1972 के तहत छुट्टियां मिलती हैं। इसमें सालाना 30 दिन अर्जित लीव, 20 दिन हाफ पे लीव (आधी सैलरी), 8 दिन केजुअल लीव और कुछ विशेष अवकाश शामिल हैं।

प्राइवेट सेक्टर में छुट्टियों की संख्या कंपनी के अनुसार बदलती है। छोटी कंपनियों में 8-12 दिन की सिक लीव पूरी सैलरी के साथ मिलती है, जबकि बड़ी कंपनियों में 10-15 दिन की मेडिकल लीव दी जाती है। ESI कर्मचारियों को 90 दिन तक 70% सैलरी और मेडिकल सहायता भी मिलती है।

हालांकि भारत में इयान क्लिफोर्ड जैसे आजिवन सैलरी और छुट्टी का प्रावधान मौजूद नहीं है।

निष्कर्ष
यह मामला कर्मचारियों के लिए उदाहरण है कि विदेशों में Sick Leave और सैलरी के नियम कितने अलग और उदार हो सकते हैं। वहीं भारत में नियम सीमित हैं और कर्मचारियों को छुट्टियों और सैलरी के लिए कंपनी और सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही लाभ मिलता है।

 

Leave a Reply