

उज्जैन | विशेष संवाददाता

बंगाली नववर्ष “पहला बैसाख” के शुभ अवसर पर धर्मनगरी उज्जैन में कला, संस्कृति और भारतीय संगीत को समर्पित एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय परिसर में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त तबला वादक Aditya Narayan Banerjee को “ताल रत्न” तथा बॉलीवुड संगीत निर्देशक एवं प्रसिद्ध कीबोर्ड वादक Kaustav Sarkar को “संगीत रत्न” सम्मान से अलंकृत किया गया।
यह सम्मान Nivrah Foundation की ओर से प्रदान किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उज्जैन प्रेस क्लब के अध्यक्ष एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के बड़े भाई Nandlal Yadav उपस्थित रहे। उन्होंने दोनों कलाकारों को सम्मान पत्र एवं स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि आदित्य नारायण बनर्जी भारतीय संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने वाले चुनिंदा कलाकारों में शामिल हैं। वे अब तक 30 से अधिक देशों और 140 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शहरों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके हैं तथा भारतीय शास्त्रीय संगीत की गरिमा को विश्व मंच पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचा चुके हैं।
वहीं कौस्तब सरकार भी बॉलीवुड संगीत जगत का एक जाना-पहचाना नाम हैं, जिन्होंने अपने संगीत निर्देशन और आधुनिक वाद्य शैली से युवा पीढ़ी के बीच विशेष पहचान बनाई है।
दोनों कलाकार इन दिनों मध्य प्रदेश में एक प्रस्तावित इंटरनेशनल म्यूजिक इंस्टीट्यूट के प्रबंधन एवं विस्तार योजना को लेकर दौरे पर हैं। इसी सिलसिले में वे बाबा Mahakaleshwar Jyotirlinga के दर्शन करने उज्जैन पहुंचे, जहां उन्हें इस विशेष सम्मान से नवाजा गया।
सम्मान समारोह के दौरान कलाकारों ने मध्य प्रदेश में कला और संगीत शिक्षा की वर्तमान स्थिति पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में वर्तमान समय में केवल सागर में ही एक प्रमुख संगीत विश्वविद्यालय संचालित है, जबकि मध्य प्रदेश के लगभग हर जिले में प्रतिभाशाली कलाकार मौजूद हैं। उचित मंच और संसाधनों की कमी के कारण कई प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पातीं।
इस अवसर पर आदित्य नारायण बनर्जी और कौस्तब सरकार ने घोषणा की कि वे Luniya Vinayak Group of Companies के सहयोग से मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में कला एवं साहित्य संस्थान स्थापित करने की योजना पर कार्य कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों, संगीतकारों और साहित्यकारों को प्रशिक्षण, मंच और अंतरराष्ट्रीय अवसर उपलब्ध कराना है।
आदित्य बनर्जी ने कहा,
“हमारा उद्देश्य केवल संगीत सिखाना नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। मध्य प्रदेश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल सही मंच और मार्गदर्शन की है।”
उन्होंने आगे कहा कि दो दिवसीय मध्य प्रदेश दौरे के दौरान महाकाल की नगरी उज्जैन में नववर्ष के शुभ अवसर पर सम्मान प्राप्त करना उनके लिए अत्यंत गर्व और सौभाग्य की बात है।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अतिथियों और कला प्रेमियों ने दोनों कलाकारों के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे भारतीय संगीत और संस्कृति के लिए एक सकारात्मक पहल बताया।


