

कोलकाता:

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार बड़ा राजनीतिक भूचाल देखने को मिला, जब लगभग 15 वर्षों तक सत्ता पर काबिज रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने ही गढ़ में सिमटकर मात्र 80 सीटों तक पहुंच गई। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब पार्टी प्रमुख एवं पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को उनके ही प्रभाव क्षेत्र में कभी TMC का साधारण कार्यकर्ता रहे Suvendu Adhikari ने 15 हजार से अधिक वोटों के भारी अंतर से पराजित कर दिया।
यह पहला अवसर नहीं है जब शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को राजनीतिक आईना दिखाया हो। इससे पहले वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने नंदीग्राम सीट पर ममता बनर्जी को लगभग 2 हजार वोटों से हराया था। हालांकि उस समय TMC ने राज्य में बहुमत हासिल कर लिया था, जिसके कारण ममता की व्यक्तिगत हार बड़ा मुद्दा नहीं बन सकी थी। लेकिन इस बार स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बाद TMC नेतृत्व में अहंकार और जनता से दूरी स्पष्ट दिखाई देने लगी थी। विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और छात्र संगठनों के साथ संवाद की कमी ने भी पार्टी को नुकसान पहुंचाया। सत्ता में रहते हुए जिन संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुलाकात की कोशिश की, उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया।
पश्चिम बंगाल में महिला सुरक्षा, बेरोजगारी, महंगाई और विकास जैसे मुद्दे लगातार जनता के बीच असंतोष का कारण बने। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और कथित भ्रष्टाचार के मामलों ने भी सरकार की छवि को प्रभावित किया। शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में बड़े विजन की कमी को लेकर युवाओं में नाराजगी बढ़ती गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा ने इन मुद्दों को मजबूती से उठाकर जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत की और सही समय पर राजनीतिक अवसर का लाभ उठाया। वहीं चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी द्वारा 100 से अधिक सीटों पर वोट चोरी के आरोप लगाने को विपक्ष राजनीतिक हताशा के रूप में देख रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि TMC को अब आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। यदि पार्टी समय रहते जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं पर काम नहीं करती, तो भविष्य में उसकी स्थिति भी कांग्रेस की तरह कमजोर हो सकती है।
अब ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती जनता का विश्वास दोबारा जीतने की है। विपक्ष में रहते हुए यदि TMC बिना जाति, धर्म और राजनीतिक भेदभाव के सामाजिक संगठनों, छात्र संगठनों और युवाओं के साथ मिलकर रोजगार, शिक्षा और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों पर गंभीरता से काम करती है, तभी पार्टी के प्रति जनता के मन में दोबारा विश्वास और समर्थन पैदा हो सकता है।


