

लखनऊ/कोलकाता:
पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हालिया मुलाकात ने देश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान जब शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास पहुंचे, तब योगी ने उन्हें भगवा पटका पहनाकर सम्मानित किया। इस दृश्य ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह के संदेश दिए और अब सवाल उठने लगा है कि क्या पश्चिम बंगाल में भी “योगी मॉडल” लागू होने जा रहा है।

शुभेंदु अधिकारी ने शपथ ग्रहण के बाद सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद लिया और फिर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। लेकिन योगी आदित्यनाथ के साथ उनका विशेष जुड़ाव समारोह का सबसे चर्चित क्षण बन गया। मंच पर “जय श्री राम” के नारों के बीच योगी द्वारा भगवा पटका पहनाना केवल सम्मान नहीं, बल्कि एक मजबूत राजनीतिक और वैचारिक संकेत माना जा रहा है।
क्या है ‘योगी मॉडल’?
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली को “योगी मॉडल” कहा जाता है, जिसमें विकास और हिंदुत्व दोनों को समान महत्व दिया जाता है। योगी आदित्यनाथ गोरक्षपीठ के महंत होने के साथ-साथ अपनी धार्मिक पहचान को खुलकर स्वीकार करते हैं। वे प्रदेश के विकास के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाए रखते हैं।
योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे, निवेश, औद्योगिक विकास और कानून व्यवस्था के क्षेत्र में बड़े स्तर पर काम किया है। “वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” का लक्ष्य लेकर सरकार ने विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए कई वैश्विक आयोजन भी किए। इसी मॉडल को अब पश्चिम बंगाल में लागू करने की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है।
शुभेंदु अधिकारी और योगी आदित्यनाथ का विशेष संबंध
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान भी शुभेंदु अधिकारी कई बार योगी आदित्यनाथ के साथ मंच साझा करते दिखाई दिए थे। एक जनसभा में उन्होंने सार्वजनिक रूप से योगी आदित्यनाथ को साष्टांग प्रणाम किया था, जिसके बाद राजनीतिक विश्लेषकों ने उनमें योगी की राजनीतिक शैली की झलक देखनी शुरू कर दी थी।
अब शपथ ग्रहण समारोह में भगवा पटका पहनाए जाने के बाद यह संदेश और अधिक मजबूत माना जा रहा है कि बंगाल भाजपा नेतृत्व उत्तर प्रदेश की रणनीति से प्रेरित होकर आगे बढ़ सकता है।
कानून व्यवस्था बनेगी सबसे बड़ी परीक्षा
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सबसे चर्चित पहचान कानून व्यवस्था को लेकर बनी। बुलडोजर कार्रवाई, अपराधियों पर सख्त एक्शन और संगठित अपराध के खिलाफ अभियान ने उन्हें “बुलडोजर बाबा” की छवि दी। 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में यही छवि भाजपा की बड़ी ताकत बनी थी।
पश्चिम बंगाल में भी लंबे समय से कानून व्यवस्था, राजनीतिक हिंसा और अपराधी सिंडिकेट जैसे मुद्दे चर्चा में रहे हैं। चुनाव प्रचार के दौरान योगी आदित्यनाथ ने बंगाल में भाजपा सरकार बनने पर यूपी की तर्ज पर सख्त कार्रवाई का वादा किया था। उन्होंने कहा था कि अपराधियों को जेल भेजा जाएगा और कानून का राज स्थापित किया जाएगा।
महिला सुरक्षा का मुद्दा भी बंगाल की राजनीति में बड़ा विषय बना हुआ है। आरजी कर मामले जैसे घटनाक्रमों ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया। योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषणों में 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश और वर्तमान यूपी की तुलना करते हुए दावा किया था कि जिस तरह यूपी में बदलाव हुआ, वैसा ही परिवर्तन बंगाल में भी संभव है।
शुभेंदु सरकार के सामने बड़ी चुनौती
अब शुभेंदु अधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती विकास, कानून व्यवस्था और राजनीतिक संतुलन को साथ लेकर चलने की होगी। यदि वे अपराध नियंत्रण, निवेश और प्रशासनिक सुधारों में सफलता हासिल करते हैं, तो भाजपा भविष्य में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर बड़े चेहरे के रूप में प्रस्तुत कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में “योगी मॉडल” को लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि यहां की सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियां उत्तर प्रदेश से अलग हैं। फिर भी भगवा पटका वाला दृश्य यह संकेत जरूर देता है कि भाजपा बंगाल में हिंदुत्व और विकास के संयुक्त एजेंडे के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है।


