
नई दिल्ली: अमेरिका में कर्ज का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। फेडरल सरकार का कर्ज अब 37 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच चुका है। वहीं, बुजुर्गों के लिए चलाए जा रहे सोशल सिक्योरिटी प्रोग्राम्स पर खर्च अब GDP का 9.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो 1980 के दशक में लगभग 6 फीसदी था। अगले दस साल में यह 11 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति मुख्य रूप से हेल्थकेयर खर्च में वृद्धि, बुजुर्गों की बढ़ती संख्या, और लंबी उम्र के कारण पैदा हुई है। अमेरिका में जीवन प्रत्याशा अब लगभग 80 साल है, जिससे रिटायरमेंट के बाद लोगों को अधिक बेनिफिट मिलता है। बजट घाटे में सबसे बड़ी हिस्सेदारी इंटरेस्ट पेमेंट्स और सोशल सिक्योरिटी प्रोग्राम्स की है।
विश्लेषकों की चेतावनी है कि यदि सुधार नहीं किए गए, तो साल 2032 तक बुजुर्गों को सोशल सिक्योरिटी का पूरा लाभ मिलने में कठिनाई हो सकती है।
साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ को अवैध करार दिया है। इससे सरकार की अतिरिक्त कमाई रुक गई है, और कर्ज की स्थिति और बिगड़ने की आशंका है। जनवरी में बजट घाटा पिछले साल की तुलना में 26% घटकर 95 अरब डॉलर पर आया। वित्तीय वर्ष 2026 के पहले चार महीनों में सरकार का कुल बजट घाटा 697 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 17% कम है।
अमेरिकी अर्थव्यवस्था में यह बढ़ता कर्ज संकट न केवल देश की वित्तीय स्थिति के लिए चुनौती है, बल्कि वैश्विक बाजारों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
