Friday, May 29

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‘100 विधायक लाओ, एक हफ्ते के लिए सीएम बन जाओ’: बयान पर सियासी घमासान, बीजेपी का पलटवार—‘अपने विधायक बचा लें तो बड़ी बात’

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में उस समय नया उबाल आ गया जब सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी सरकार के दोनों डिप्टी सीएम को खुला ऑफर दे दिया। लखनऊ स्थित पार्टी दफ्तर में उन्होंने कहा, “100 विधायक लाओ और मुख्यमंत्री बन जाओ। जो 100 विधायक साथ लाएगा, वह एक हफ्ते के लिए मुख्यमंत्री बनेगा।”

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विदेश दौरे के बीच दिए गए इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। बीजेपी नेताओं ने इसे लेकर सपा प्रमुख पर तीखा हमला बोला है।

‘पहले अपने विधायक संभाल लें’—केशव मौर्य

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने पलटवार करते हुए कहा, “समाजवादी पार्टी में बीजेपी से तो कोई आने वाला नहीं है। अखिलेश यादव अपने विधायकों को बचा लें तो बड़ी बात होगी।”

उन्होंने सोशल मीडिया पर भी तंज कसते हुए लिखा कि गुंडई की राजनीति की विरासत ज्यादा दिन नहीं चलती। मौर्य के इस बयान के बाद सियासी जुबानी जंग और तेज हो गई है।

‘राजनेता कम, पोगो के कैरेक्टर ज्यादा’—बीजेपी

बीजेपी प्रवक्ता मनीष शुक्ला ने अखिलेश यादव के बयान को उनकी राजनीतिक हताशा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा, “सपा प्रमुख अब राजनेता कम, पोगो चैनल के कैरेक्टर ज्यादा लगते हैं। जब भी वे टीवी पर आते हैं, लोग उन्हें गंभीरता से नहीं लेते।”

बीजेपी नेताओं का कहना है कि इस तरह के बयान लोकतांत्रिक व्यवस्था का मजाक उड़ाने जैसे हैं।

‘भाड़े के पहलवान से जीत नहीं मिलती’—संजय निषाद

यूपी सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने भी सपा प्रमुख पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजनीति अखाड़े की तरह होती है, जहां अपने दम पर लड़ना पड़ता है।

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का जिक्र करते हुए कहा कि वे संगठन खड़ा करने और जमीन पर संघर्ष करने में विश्वास रखते थे, लेकिन आज हालात अलग हैं। “भाड़े के पहलवान से कभी जीत हासिल नहीं की जा सकती,” निषाद ने तंज कसा।

‘मुंगेरी लाल के हसीन सपने’—आरपी सिंह

बीजेपी नेता आरपी सिंह ने भी बयान को लोकतंत्र का मजाक बताया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव जानते हैं कि वे अपने दम पर सत्ता में नहीं आ सकते, इसलिए ऐसे “मुंगेरी लाल के हसीन सपने” देखते रहते हैं।

पुरानी नोकझोंक का इतिहास

अखिलेश यादव और केशव मौर्य के बीच तल्खी नई नहीं है। वर्ष 2022 में विधानसभा सत्र के दौरान दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हुई थी, जिसे शांत कराने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हस्तक्षेप करना पड़ा था। उस दौरान भी सदन की कार्यवाही बाधित हुई थी और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर अभद्र भाषा के आरोप लगाए थे।

चुनावी मौसम में बयानबाजी तेज

आगामी पंचायत और विधानसभा चुनावों की आहट के बीच राजनीतिक बयानबाजी का स्तर लगातार तीखा होता जा रहा है। सपा और बीजेपी के बीच यह जुबानी जंग आने वाले दिनों में और तेज होने के संकेत दे रही है।

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