
काबुल/इस्लामाबाद: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सैन्य टकराव का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान ने रविवार तड़के अफगानिस्तान में सात ठिकानों पर हवाई हमले किए। पाकिस्तानी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई पाकिस्तानी तालिबान (TTP) और इस्लामिक स्टेट के आतंकवादियों के खिलाफ की गई थी। वहीं, अफगान तालिबान ने इसे आम नागरिकों पर हमला करार दिया और जवाब देने की चेतावनी दी है।
पाकिस्तान की ओर से सैन्य कार्रवाई
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बताया कि इन एयरस्ट्राइक्स में 80 से अधिक चरमपंथी मारे गए। पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि यह कार्रवाई सीमा पार से होने वाले आतंकवाद को रोकने के लिए की गई, और अगर पाकिस्तान में खून-खराब जारी रहा तो जिम्मेदारों को बख्शा नहीं जाएगा।
अफगान तालिबान की प्रतिक्रिया
अफगान तालिबान ने हमलों को स्वीकार्य नहीं माना और कहा कि यह आम नागरिकों पर हमला था। अफगान विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान के इस तरह के हमले वहां विरोधी भावना को और बढ़ावा दे सकते हैं, जिससे पाकिस्तान के खिलाफ सुरक्षा चुनौती और गंभीर हो सकती है।
विशेषज्ञों की चेतावनी
स्वतंत्र सुरक्षा शोधकर्ता अब्दुल सईद के अनुसार, पाकिस्तान आगे भी हवाई हमले कर सकता है। पूर्व विशेष प्रतिनिधि आसिफ दुर्रानी ने कहा कि तालिबान TTP को नियंत्रित करने में गंभीर नहीं हैं और ऐसे हमले अफगानिस्तान में पाकिस्तान विरोधी भावना को बढ़ा सकते हैं।
पिछले साल की स्थिति और खतरा
पिछले साल अक्टूबर में भी इसी तरह के हालात बने थे। 9 अक्टूबर को पाकिस्तान ने अफगान सीमावर्ती इलाकों और काबुल में हवाई हमले किए थे। इसके जवाब में अफगान बलों ने पाकिस्तान की चौकियों पर हमला किया। करीब एक सप्ताह तक चले सैन्य टकराव में दोनों तरफ सैकड़ों लोग मारे गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा घटनाक्रम उसी ओर इशारा करता है और अगर कूटनीतिक प्रयास तेज नहीं हुए, तो पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच नया सैन्य टकराव भड़क सकता है।
