Monday, February 23

नाम पूछा और बदल गई नीयत: टोंक में कंबल वितरण पर घिर गए पूर्व सांसद, राजनीतिक संग्राम तेज

टोंक/निवाई, 23 फरवरी 2026: Rajasthan के टोंक जिले में आयोजित एक कंबल वितरण कार्यक्रम उस समय विवादों में घिर गया, जब पूर्व भाजपा सांसद Sukhbir Singh Jaunapuria पर एक मुस्लिम महिला से नाम पूछने के बाद कंबल वापस लेने का आरोप लगा। यह घटना 22 फरवरी को निवाई तहसील के करेड़ा बुजुर्ग गांव में हुई, जिसने अब राजनीतिक रंग ले लिया है।

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नाम सुनते ही बदले तेवर

जानकारी के अनुसार, गांव के एक मंदिर परिसर में जरूरतमंदों को कंबल वितरित किए जा रहे थे। कतार में कई मुस्लिम महिलाएं भी खड़ी थीं। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि जब एक महिला कंबल लेने पहुंची और उसने अपना नाम बताया, तो पूर्व सांसद का व्यवहार अचानक बदल गया।

आरोप है कि उन्होंने कहा—“जो लोग प्रधानमंत्री को गाली देते हैं, उन्हें कंबल लेने का अधिकार नहीं है।” इसके बाद महिला से कंबल वहीं छोड़कर हट जाने को कहा गया। मौके पर मौजूद कुछ ग्रामीणों ने आपत्ति जताई, लेकिन कार्यक्रम निजी होने की बात कहकर पूर्व सांसद वहां से रवाना हो गए।

पूर्व सांसद की सफाई: ‘निजी कार्यक्रम, मेरी मर्जी’

मामला तूल पकड़ने के बाद सुखबीर सिंह जौनापुरिया ने सफाई देते हुए कहा कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से व्यक्तिगत स्तर पर आयोजित किया गया था। इसमें किसी सरकारी योजना या सार्वजनिक धन का उपयोग नहीं हुआ।

उनका तर्क है कि निजी धन से आयोजित कार्यक्रम में यह निर्णय लेने का अधिकार आयोजक के पास होता है कि किसे दान दिया जाए। उन्होंने किसी प्रकार के धार्मिक भेदभाव के आरोपों से इनकार किया।

कांग्रेस का हमला, ‘संविधान का अपमान’

इस घटना पर टोंक-सवाई माधोपुर से कांग्रेस सांसद Harish Meena ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर वीडियो साझा कर इस कृत्य को ‘शर्मनाक’ और ‘अमानवीय’ बताया।

मीणा ने कहा कि गरीब महिलाओं को धर्म और नाम के आधार पर अपमानित करना देश के सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करने वाली सोच है। उन्होंने इसे बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के संविधान का अपमान बताया और प्रधानमंत्री से ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की मांग की।

बढ़ता राजनीतिक तापमान

घटना के बाद टोंक जिले में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। एक ओर जहां भाजपा के पूर्व सांसद इसे निजी अधिकार का मामला बता रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसे धार्मिक भेदभाव और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ करार दे रही है।

यह विवाद अब सामाजिक समरसता और राजनीतिक नैतिकता के बड़े सवाल खड़े कर रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और सियासी बयानबाजी तेज होने की संभावना है।

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