
नई दिल्ली: देश में एआई (AI) के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए सरकार ने शुक्रवार से नए नियम लागू कर दिए हैं। अब अगर कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो AI की मदद से बनाया गया है, तो उस पर ‘लेबल’ लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही, किसी भी आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायत मिलने पर प्लेटफॉर्म्स को महज 3 घंटे में उसे हटाना होगा।
नोटिफिकेशन और प्रधानमंत्री की पहल
इस नियम का नोटिफिकेशन 10 फरवरी 2026 को जारी किया गया था। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कई देशों ने भारत के इस कदम की सराहना की है और वे भी इसी तरह के उपाय पर विचार कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने AI समिट में डिजिटल कंटेंट पर लेबलिंग की तुलना ‘न्यूट्रिशन लेबल’ से करते हुए कहा था कि इससे लोगों को पता चलेगा कि क्या कंटेंट असली है और क्या AI से तैयार किया गया है।
AI कंटेंट पर लागू होंगे नियम
लेबलिंग: जैसे खाने के पैकेट पर ‘शाकाहारी’ या ‘मासाहारी’ लिखा होता है, वैसे ही हर AI फोटो और वीडियो पर लेबल अनिवार्य होगा।
टेक्निकल मार्कर: कंटेंट में छेड़छाड़ या वॉटरमार्क हटाने की कोशिश को रोकने के लिए फाइल के कोडिंग में तकनीकी मार्कर लगाया जाएगा।
गंभीर अपराध: AI का इस्तेमाल चाइल्ड पोर्नोग्राफी, अश्लीलता, धोखाधड़ी, हथियारों की जानकारी या किसी की नकल के लिए किया गया, तो इसे गंभीर अपराध माना जाएगा।
उदाहरण और कार्रवाई
मंत्री वैष्णव ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी के विवाद का जिक्र किया। यूनिवर्सिटी ने एक चीनी रोबोटिक डॉग के डेमो को अपना आविष्कार बताया था। वीडियो वायरल होने पर यूनिवर्सिटी को एक्सपो से बाहर कर दिया गया। वैष्णव ने कहा कि सरकार ऐसे मामलों में तुरंत कार्रवाई करती है।
“हम AI के अच्छे काम को बढ़ावा देंगे और गलत इस्तेमाल पर सख्त कदम उठाएंगे।”
निष्कर्ष
नई नियमावली से डिजिटल दुनिया में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित होगी। AI से जुड़े फेक कंटेंट, धोखाधड़ी और बच्चों के लिए खतरनाक सामग्री पर तेज कार्रवाई की जा सकेगी, जिससे सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी।
