Saturday, February 21

80 देशों के हस्ताक्षर की उम्मीद, भारत ने दिखाई एआई में वैश्विक क्षमताएं

नई दिल्ली: इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के ‘दिल्ली डेक्लेरशन’ को आज जारी किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इस पर लगभग 80 देशों के हस्ताक्षर होंगे, जबकि अब तक 70 देशों ने अपनी सहमति जताई है। यह जानकारी केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने समिट की क्लोजिंग प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी।

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समिट में भागीदारी और भारत की पहल

वैष्णव ने बताया कि समिट में पांच लाख से अधिक लोग शामिल हुए। भारत ने इस मंच पर अपनी एआई क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि भारत 20 लाख युवाओं को एआई में प्रशिक्षण देगा, जिसका फॉर्मेट इंडस्ट्री के साथ मिलकर तय किया जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने पैक्स सिलिका अलायंस और रिजिलियंट सप्लाई चेन पर भी चर्चा की, और कहा कि भारत को इस क्षेत्र में विश्वसनीय साझेदार माना जा रहा है।

डेक्लेरशन पर वैश्विक समर्थन

वैष्णव ने बताया कि बीते साल पेरिस एक्शन समिट में 60 देशों ने आउटकम डॉक्यूमेंट पर हस्ताक्षर किए थे। दिल्ली डेक्लेरशन के लिए अब तक 70 देशों ने अपनी सहमति दी है, और समिट के समापन पर यह संख्या बढ़कर लगभग 80 देशों तक पहुँचने की उम्मीद है।

कांग्रेस विरोध को युवा वर्ग ने नकारा

मंत्री ने यूथ कांग्रेस के प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि भले ही कांग्रेस ने समिट को बाधित करने की कोशिश की, लेकिन देश के युवाओं ने उनकी नकारात्मकता को खारिज कर दिया। वैष्णव ने इसे दुखद और हास्यास्पद बताया और कहा कि युवा एआई इकोसिस्टम को लेकर बेहद उत्साहित और आशावान हैं।

विवाद और कार्रवाई

वैष्णव ने गलगोटिया यूनिवर्सिटी के चीनी रोबोटिक डॉग डेमो विवाद का बिना नाम लिए जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कुछ गलत चुनाव हुए थे, लेकिन सरकार ने फौरन कार्रवाई की।

डेटा प्रोटेक्शन और डिजिटल नेतृत्व

वैष्णव ने कहा कि भारत के सोवर्न मॉडल और डीपीडीपी फ्रेमवर्क को कई देशों ने सराहा। तीन देशों ने यह भी कहा कि वे आगे अपनी नीतियों को भारत के कानूनों के अनुरूप विकसित करेंगे।

“इस समिट में बड़े एआई खिलाड़ी एक मंच पर आए और भारत के प्रयासों की सराहना की। अगर एआई को हर किसी तक पहुँचाना है, तो राज्यों के साथ नजदीकी सहयोग जरूरी है।”

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