
मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने सामाजिक न्याय विभाग के माध्यम से मंगलवार देर रात एक सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी कर मुस्लिम समुदाय को दी गई 5% आरक्षण को रद्द कर दिया है। इस आरक्षण का इस्तेमाल पहले शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश और सरकारी व अर्ध-सरकारी नौकरियों में भर्ती के लिए किया जाता था।
आदेश का विवरण
सरकार ने यह निर्णय न्यायालयों के फैसलों और 2014 की नीति के अनुरूप लिया है। 2014 में तत्कालीन कांग्रेस-एनसीपी सरकार ने विधानसभा चुनावों से पहले एक अध्यादेश जारी किया था, जिसमें मुसलमानों के लिए 5% आरक्षण और मराठों के लिए 16% आरक्षण लागू किया गया था।
इस आदेश के तहत नवगठित विशेष पिछड़ा वर्ग-ए में शामिल 50 मुस्लिम समुदायों को यह कोटा दिया गया था।
मुस्लिम समुदाय की स्थिति
महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या 11.5% है। पहले न्यायमूर्ति राजिंदर सच्चर आयोग (2006) और न्यायमूर्ति रंगनाथ मिश्रा समिति (2004) की रिपोर्टों ने मुस्लिम समुदाय के आर्थिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन को दर्शाया था। 2009 में कांग्रेस सरकार ने डॉ. महमूदुर रहमान समिति का गठन किया, जिसने शिक्षा और नौकरियों में मुस्लिम समुदाय के लिए 8% आरक्षण की सिफारिश की थी।
सरकार का तर्क
सरकार ने कहा कि यह निर्णय मौजूदा कानूनी स्थिति और न्यायालयों के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। अब इस आदेश के बाद, मुस्लिम समुदाय को सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में आरक्षण नहीं मिलेगा।
