
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने बजट पेश करने से एक दिन पहले ₹5,600 करोड़ का नया कर्ज लेकर सभी को चौंका दिया है। इस कर्ज के साथ अब राज्य पर कुल कर्ज ₹4.90 लाख करोड़ तक पहुँच गया है, जो वर्ष 2025-26 के बजट आकार ₹4.21 लाख करोड़ से भी अधिक है।
आर्थिक सर्वेक्षण में दावा
उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने मंगलवार को विधानसभा में मध्य प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया। रिपोर्ट में बताया गया कि राज्य की विकास दर 8.04% रहने का अनुमान है। सर्वेक्षण में यह भी कहा गया कि राज्य द्वारा लिया गया वार्षिक कर्ज भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा तय सीमा से अधिक नहीं रहा है।
कर्ज और सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का अनुपात 2004-05 में 39.5% था, जो 2023-24 में घटकर 27.99% हो गया। हालांकि, अनुमान है कि 2025-26 में यह अनुपात बढ़कर 31.30% हो सकता है।
कर्ज पर ब्याज दर में कमी का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2024 में बकाया कर्ज पर औसत ब्याज दर 7.28% थी, जो मार्च 2025 तक घटकर 7.11% होने की संभावना है। इससे राज्य पर कर्ज चुकाने का बोझ कम होने का संकेत मिलता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कोविड महामारी (2019-20) के दौर को छोड़कर, राज्य सरकार की वित्तीय नीतियों ने घाटे को नियंत्रण में रखा है।
इस वित्तीय वर्ष में कुल कर्ज
मंगलवार को लिए गए ₹5,600 करोड़ के कर्ज को जोड़कर वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य द्वारा लिया गया कुल कर्ज ₹70,000 करोड़ से अधिक हो गया है। इसके अलावा, चालू वित्तीय वर्ष के खर्चों को पूरा करने के लिए अनुपूरक बजट भी विधानसभा में पारित किया गया है।
राज्य सरकार का दावा है कि राजस्व संग्रह और केंद्रीय करों में राज्य के हिस्से में वृद्धि से मध्य प्रदेश राजस्व अधिशेष और वित्तीय स्थिरता बनाए रख सकेगा।
