
जयपुर। आमतौर पर आसमान में उड़ते कबूतरों को देखकर शांति और सुकून का अहसास होता है, लेकिन राजधानी में इन मासूम परिंदों के पंखों पर लाखों रुपये का जुआ खेला जा रहा था। विधायकपुरी थाना पुलिस ने मकराना निवासी तीन सट्टेबाजों को 42 कबूतरों के साथ गिरफ्तार कर इस काले खेल का भंडाफोड़ किया है।
क्रूर ट्रेनिंग और पंख काटे जाते थे
जांच में सामने आया कि इन कबूतरों को ‘आसमान का सिकंदर’ बनाने के लिए 30 से 60 दिनों तक कड़ी और क्रूर ट्रेनिंग दी जाती थी। शुरुआत में उनके पंख काट दिए जाते थे ताकि वे भाग न सकें। 4 से 8 सप्ताह में नए पंख उगने लगते हैं, तब तक उन्हें मालिक की आवाज और खास सीटी की आदत डाल दी जाती है। इन्हें सीमित दायरे में रखा जाता और विशेष दाना खिलाया जाता है। अंत में झुंड में छोड़कर परखा जाता कि कौन सा कबूतर सबसे ऊंचाई पर और सबसे लंबे समय तक उड़ सकता है।
एक उड़ान, लाखों का इनाम
यह खेल महज शौक नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की सट्टेबाजी का जरिया बन चुका है। सूत्रों के मुताबिक, एक मुकाबले में करीब 30 कबूतर उड़ते हैं और हर मालिक का दांव 20 हजार रुपये से शुरू होता है। विजेता कबूतर के मालिक को एक झटके में 6 लाख रुपये तक की पुरस्कार राशि मिलती है। कबूतरों के पैरों में मालिक के नाम की रिंग या चिट बांधी जाती है, और सट्टेबाज दूरबीन से उड़ान की ऊंचाई और दिशा पर नजर रखते हैं।
राजधानी के कई इलाकों में सक्रिय खेल
जयपुर के आजाद नगर, घाटगेट, आदर्श नगर, रामगंज, ईदगाह और दिल्ली रोड इलाके इस अवैध खेल के गढ़ बन चुके हैं। पुलिस अब इस सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं की तलाश कर रही है, ताकि बेजुबान पक्षियों के साथ हो रही क्रूरता को रोका जा सके।
