
नई दिल्ली: फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को धोखाधड़ी के 30 करोड़ रुपये के मामले में शुक्रवार को जमानत मिल गई। 67 दिनों तक जेल में बंद रहने के बाद दोनों को उदयपुर जेल से रिहा किया गया।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश:
सुप्रीम कोर्ट की पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने विक्रम और श्वेतांबरी को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। कोर्ट ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को जमानत आदेश पारित करने और उसकी शर्तों को स्पष्ट करने का निर्देश भी दिया। साथ ही, शिकायतकर्ता अजय मुर्डिया और राजस्थान सरकार को 19 फरवरी को सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया गया।
वकील का बयान:
अदालत में केस देख रहे वकील मुकुल रोहतगी ने कहा, “वह निर्देशक, उनकी पत्नी—सभी को जेल में नहीं डाल सकते। आखिर चल क्या रहा है?” अदालत ने टिप्पणी की कि ऐसे मामलों का इस्तेमाल केवल पैसा वसूलने के लिए नहीं किया जा सकता।
गिरफ्तारी और जेल की अवधि:
विक्रम और श्वेतांबरी को मुंबई में गिरफ्तार किया गया था। उन्हें दिसंबर 2025 में उदयपुर जेल लाया गया और 7 दिसंबर से जेल में रखा गया। उनके साथ दिनेश कटारिया और प्रबंधक महबूब अंसारी को भी राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 31 जनवरी को राजस्थान उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
धोखाधड़ी का आरोप:
शिकायतकर्ता अजय मुर्डिया ने आरोप लगाया कि विक्रम, श्वेतांबरी और अन्य ने फिल्म के नाम पर 30 करोड़ रुपये लिए और उसका दुरुपयोग किया। उन्होंने फर्जी बिल बनाए और पैसे निजी खातों में जमा किए।
बेटी भी मामले में शामिल:
जनवरी में एक अन्य शिकायत में आरोप लगाया गया कि विक्रम की बेटी कृष्णा भट्ट सारदा ने 13.5 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। मामला मुंबई के वर्सोवा पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) इसकी जांच कर रही है।
वर्तमान स्थिति:
अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी जेल से रिहा हो चुके हैं। अगले चरण की सुनवाई 19 फरवरी को होगी, जिसमें मामले की आगे की प्रक्रिया तय होगी।
