
खरगोन: मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में वर्ष 2014 का एक दर्दनाक मामला अब नया मोड़ ले चुका है। सरकारी आयुर्वेदिक कंपाउंडर द्वारा गलत एलोपैथिक इलाज देने से 27 वर्षीय जितेंद्र सिंह की मौत हो गई थी। अब जिला उपभोक्ता फोरम ने कंपाउंडर को दोषी ठहराते हुए पीड़ित परिवार को 7 लाख रुपये मुआवजा और 6% ब्याज सहित कुल लगभग 11 लाख रुपये देने का आदेश दिया है।
मामला ग्राम नादला निवासी किसान निहालसिंह द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में कहा गया कि 3 दिसंबर 2014 को उनके पुत्र जितेंद्र सिंह को हाथ-पैर में तेज दर्द की शिकायत पर ग्राम सिनगुन स्थित गुप्ता क्लीनिक ले जाया गया। आरोप है कि क्लीनिक संचालक निर्मल गुप्ता ने 600 रुपये लेकर बिना किसी जांच के पालीबियोन, एसीलार और डेक्सोना इंजेक्शन मिला कर बोतल चढ़ा दी। इंजेक्शन लगाने के तुरंत बाद युवक की तबियत बिगड़ गई। जब उसने बोतल हटाने की बात कही, तो निर्मल गुप्ता ने कहा कि “मैं डॉक्टर हूं, इलाज जारी रहेगा।” कुछ ही समय बाद युवक की मृत्यु हो गई।
परिवार का आरोप था कि आयुर्वेदिक कंपाउंडर होने के बावजूद उन्होंने एलोपैथिक दवा देकर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर इलाज किया। पुलिस जांच में एलोपैथिक दवाइयों की जब्ती हुई और जिला आयुष अधिकारी की समिति ने प्रारंभिक रूप से लापरवाही पाई। हालांकि, न्यायालय ने आपराधिक मामले में उन्हें दोषमुक्त करार दिया था।
उपभोक्ता फोरम ने बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज करते हुए गवाहों के शपथपत्र, दस्तावेज और विभागीय रिपोर्ट को मान्य माना और सेवा में कमी सिद्ध मानी। आयोग ने कहा कि यह मामला चिकित्सा क्षेत्र में जवाबदेही की महत्वपूर्ण मिसाल है। साथ ही, युवक होनहार छात्र था और उसकी असामयिक मृत्यु से परिवार को गहरा आघात पहुंचा।
निर्णय आयोग के अध्यक्ष विकास राय और सदस्य डॉ. तृप्ति शास्त्री की पीठ ने पारित किया।
