
पटना: बिहार की राजधानी पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद छात्रा की कथित रेप और मौत मामले की जांच अब CBI के हाथों में है। लेकिन इस केस के पहले सबूतों के हश्र और कथित छेड़छाड़ के चलते सवाल उठ रहे हैं कि क्या CBI सच तक पहुंच पाएगी या नहीं।
घटना की पृष्ठभूमि:
6 जनवरी 2026 को नीट छात्रा को हॉस्टल के कमरे में बेहोश पाया गया। इलाज के दौरान 11 जनवरी को उनकी मौत हो गई। पटना के चित्रगुप्त नगर थाना में 9 जनवरी को मामला दर्ज हुआ। 15 जनवरी को जारी एम्स और पीएमसीएच की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा के संकेत मिले, जबकि पीएमसीएच रिपोर्ट में छात्रा के शरीर पर 10 से अधिक जख्म पाए गए।
SIT जांच पर उठे सवाल:
घटना के बाद बिहार पुलिस ने हॉस्टल के मालिक मनीष रंजन को गिरफ्तार किया और जांच SIT को सौंप दी। लेकिन परिवार ने SIT जांच पर सवाल उठाए क्योंकि टीम मृतक छात्रा के घरवालों का DNA इकट्ठा करने लगी। इसके बाद केंद्र सरकार को मामले की जांच सिफारिश की गई, और CBI ने फाइलें लेकर दिल्ली में जांच शुरू की।
लीपापोती की तैयारी?
वरिष्ठ अधिवक्ता आशुतोष सिंह ने कहा, “CBI के लिए जांच करना आसान नहीं है। घटना स्थल को सील नहीं किया गया, बेड शीट धो दी गई, CCTV के DVR में छेड़छाड़ की गई। ऐसे हालात में CBI को सच तक पहुंचने में कठिनाई होगी। परिवार ने न्यायिक जांच की मांग की थी, लेकिन सरकार ने CBI को सौंप कर मामले की लीपापोती की तैयारी कर दी।”
CBI की राह में बाधाएं:
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SIT ने जांच शुरू होने से पहले इसे सुसाइड बता दिया। CBI क्या इस दाब से अलग होकर जांच शुरू कर पाएगी?
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CBI को बिहार पुलिस के साथ काम करना होगा, क्या प्रशासन पहले हुई जांच से मुक्त होगा या वही सुसाइड थ्योरी दोहराएगा?
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छात्रा के बेड की चादर धो दी गई, जिससे महत्वपूर्ण सबूत मिट गए।
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हॉस्टल से प्राप्त DVR में CCTV फुटेज में छेड़छाड़ की गई, जो CBI जांच में बड़ी बाधा बन सकती है।
निष्कर्ष:
सीबीआई जांच के बावजूद इस मामले में सच तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। सबूतों की कमी और संभावित छेड़छाड़ से न्याय की राह मुश्किल है, लेकिन अब परिवार और जनता की निगाहें CBI जांच पर टिकी हैं।
