
ढाका, 13 फरवरी 2026: बांग्लादेश की राजनीति में करीब दो दशकों के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सत्ता में लौट रही है। तारिक रहमान अब देश के अगले प्रधानमंत्री बनने के कगार पर हैं। उनकी ताजपोशी के साथ ही पाकिस्तान-बांग्लादेश संबंधों को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
तारिक रहमान की जीत और राजनीतिक वापसी
60 साल के तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद 25 दिसंबर को लंदन से लौटे। बांग्लादेश चुनाव में BNP ने 151 सीटों का बहुमत पार कर लिया है और कई सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार जल्द ही सत्ता हस्तांतरण कर सकती है।
रहमान बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान और तीन बार प्रधानमंत्री खालिदा जिया के सबसे बड़े बेटे हैं। 2001 में BNP के सत्ता में रहते हुए उन्हें ‘पैरेलल पावर सेंटर’ कहा जाता था। अमेरिकी डिप्लोमैटिक केबल्स में उन्हें ‘डार्क प्रिंस’ के रूप में वर्णित किया गया, जिसमें राजनीतिक हिंसा में उनकी भूमिका का जिक्र है।
विदेश नीति पर रहमान का रुख
BNP नेता ने जनवरी में सिलहट में चुनाव अभियान के दौरान स्पष्ट किया कि उनकी प्राथमिकता बांग्लादेश को सबसे पहले रखना है। उनके नारे ‘न दिल्ली, न पिंडी, सबसे पहले बांग्लादेश’ से उनके विदेश नीति के रुख का संकेत मिलता है। उन्होंने जमात-ए-इस्लामी पर भी कट्टरता के लिए निशाना साधा।
प्रमुख विदेश नीति संकेत:
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भारत के साथ बराबरी और आपसी सम्मान पर आधारित रिश्तों को बढ़ावा देना।
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चीन और भारत के साथ संतुलन बनाए रखना।
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SAARC को पुनर्जीवित करना और ASEAN की सदस्यता के लिए प्रयास करना।
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पाकिस्तान के साथ मेल-मिलाप वाले संपर्कों को जारी रखना।
पाकिस्तान के लिए BNP की जीत के मायने
रहमान की सत्ता में वापसी पाकिस्तान के लिए मिला-जुला संदेश है। BNP का पाकिस्तान के साथ पुराना रिश्ता रहा है, और जमात-ए-इस्लामी के साथ पूर्व में गठबंधन भी रहा। लेकिन रहमान का ‘न दिल्ली, न पिंडी’ वाला रुख और जमात-ए-इस्लामी का अब BNP का विरोधी बन जाना पाकिस्तान के प्रभाव को सीमित कर सकता है। BNP अब पाकिस्तान के साथ सावधानीपूर्वक और संतुलित संबंध बनाए रखने की संभावना है।
