
ढाका, 13 फरवरी 2026: बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरमैन तारिक रहमान अब बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। 12 फरवरी को हुए चुनाव में उनकी पार्टी ने जबरदस्त जीत हासिल की है। BNP अब तक 175 सीटें जीत चुकी है और 200 से अधिक सीटों पर जीतने की संभावना जताई जा रही है।
कैदी से नेता तक का सफर
60 साल के रहमान ने 17 साल का निर्वासन लंदन में बिताया और दिसंबर 2025 में देश लौटे। शेख हसीना के कार्यकाल में एक बम धमाके के आरोप में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया।
‘डार्क प्रिंस’ और ‘हवा भवन’
2005 में अमेरिकी डिप्लोमेटिक केबल में रहमान को “डार्क प्रिंस” कहा गया था। उस दौर में उन्हें देश में समानांतर सरकार चलाने और हिंसक राजनीति में शामिल होने का आरोप था। ‘हवा भवन’ नामक दो मंजिला इमारत से वह पिछली BNP सरकार के दौरान असल में प्रशासन चला रहे थे। अब सवाल उठता है कि क्या रहमान फिर से सत्ता ‘हवा भवन’ से संचालित करेंगे या पारदर्शी शासन देंगे।
चुनावी जीत और वादे
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प्रधानमंत्री के लिए सिर्फ दो टर्म और 10 साल की लिमिट
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उप-राष्ट्रपति पद की स्थापना
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भ्रष्टाचार पर “ज़ीरो टॉलरेंस”
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किसानों के लोन का ब्याज माफ
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युवाओं के लिए 20 लाख नई नौकरियां
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महिलाओं के लिए मुफ्त शिक्षा
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अल्पसंख्यकों और महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर कड़ा रुख
विदेश नीति का नया रुख
भारत के साथ: नए नेतृत्व का दावा है कि रिश्ते आपसी सम्मान और हित पर आधारित होंगे।
चीन के साथ: बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट और 6 अरब डॉलर के बकाया लोन जारी रहेंगे।
पाकिस्तान के साथ: यूनुस सरकार द्वारा शुरू की गई नजदीकी बरकरार रखी जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि रहमान का “बांग्लादेश फर्स्ट” सिद्धांत शेख हसीना युग के रणनीतिक तालमेल से अलग होगा। उनका रुख पड़ोसी देशों के साथ संतुलन बनाकर रखा जाएगा, लेकिन चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में बांग्लादेश अधिक आक्रामक पड़ोसी बन सकता है।
आलोचना और चुनौतियां
आलोचक तारिक रहमान की विरासत उनके परिवार से जोड़ते हैं और सवाल करते हैं कि क्या वह संविधान आधारित शासन चला पाएंगे। विरोधी उन्हें पुराने कॉन्ट्रैक्ट और चुनावी गलतियों की वजह से “खंबा तारिक” भी कहते हैं।
निष्कर्ष: बांग्लादेश का राजनीतिक परिदृश्य अब तारिक रहमान के नेतृत्व में बदलने जा रहा है। उनके प्रशासन की पारदर्शिता, ‘हवा भवन’ का प्रभाव और पड़ोसी देशों के साथ संतुलित नीति देश और क्षेत्र की स्थिरता पर बड़ी छाप छोड़ेगी।
