
ढाका, 13 फरवरी 2026: बांग्लादेश में गुरुवार को हुए संसदीय चुनाव में छात्र नेताओं की पार्टी NCP (नेशनल सिटीजन पार्टी) पूरी तरह से असफल रही। शेख हसीना के खिलाफ जुलाई-अगस्त 2024 में विद्रोह करने वाले छात्र नेताओं ने मोहम्मद यूनुस के निर्देशन में यह पार्टी बनाई थी, लेकिन चुनाव में उन्हें सिर्फ 6 सीटें ही मिलीं।
NCP का चुनावी प्रदर्शन
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NCP ने कुल 30 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ 3-6 सीटों पर ही सफलता मिली।
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पार्टी के प्रमुख चेहरे नाहिद इस्लाम ने ढाका-11 से केवल 2,039 वोटों से जीत हासिल की।
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रंगपुर-4 से अख्तर हुसैन और कुरीग्राम-2 से अतीकुर रहमान ने जीत दर्ज की, लेकिन अधिकांश उम्मीदवार हार गए।
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लक्ष्मीपुर-1 में छात्र प्रदर्शन के प्रमुख मोहम्मद महबूब आलम 59,265 वोटों के साथ चुनाव हार गए।
हार के कारण
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अंतर पार्टी संघर्ष: NCP के भीतर छात्र नेताओं के बीच सत्ता और प्रतिष्ठा की होड़ ने संगठन को कमजोर कर दिया।
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महिला वोटरों का विरोध: जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन करने के कारण महिला वोटरों का समर्थन नहीं मिला।
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कट्टरपंथी छवि: छात्र आंदोलन को उदारवादी और सेक्युलर समझा जाता था, लेकिन जमात के साथ गठबंधन ने उनके समर्थन को कम किया।
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अभियान में असंगति: नेता खुद को टीवी और मीडिया में दिखाने में व्यस्त रहे, बूथ स्तर से संगठन खड़ा करने में विफल रहे।
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BNP और जमात गठबंधन के सामने दबाव: चुनाव पूरी तरह BNP बनाम जमात गठबंधन में सीमित रहा, तीसरे विकल्प के रूप में उभरी NCP को मतदाताओं ने गंभीरता से नहीं लिया।
चुनाव की बड़ी तस्वीर
बांग्लादेश में कुल वोटिंग लगभग 48 प्रतिशत ही रही। BNP ने 200 से अधिक सीटें जीतने का अनुमान लगाया गया है, जिससे तारिक रहमान अगले प्रधानमंत्री बनने के कगार पर हैं। वहीं, NCP की बुरी हार ने दिखा दिया कि छात्र नेता केवल प्रदर्शन और आंदोलन से सरकार नहीं चला सकते, उन्हें संगठित रणनीति और कैडर प्रणाली की आवश्यकता है।
निष्कर्ष: छात्र नेताओं की NCP ने राजनीतिक बदलाव की उम्मीदें जगाईं, लेकिन BNP जैसी पुरानी और स्थापित पार्टी के सामने उनका ढांचा कमजोर साबित हुआ। कट्टरपंथी जमात के साथ गठबंधन ने उनके सेक्युलर और समावेशी एजेंडे को भी नुकसान पहुंचाया।
