Friday, February 13

बांग्लादेश में चुनाव के बीच भारत में चिंता और उम्मीद, नेताओं ने कहा—अल्पसंख्यकों की सुरक्षा हो, लोकतंत्र रहे मजबूत

नई दिल्ली। बांग्लादेश में लंबे समय बाद हो रहे संसदीय चुनाव के बीच भारत में राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। विभिन्न दलों के नेताओं ने बांग्लादेश की वर्तमान स्थिति, लोकतांत्रिक प्रक्रिया और खासतौर पर अल्पसंख्यक समुदायों पर बढ़ते हमलों को लेकर चिंता जताई है। नेताओं ने उम्मीद व्यक्त की कि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होगा और नई सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।

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बीजेपी नेताओं ने जताई चिंता

भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य ने कहा कि बांग्लादेश में जो भी सरकार बने, वह उसे शुभकामनाएं देते हैं, लेकिन उन्होंने चेताया कि हाल के वर्षों में वहां का माहौल सांप्रदायिकता और उग्रवादी गतिविधियों से प्रभावित रहा है। उन्होंने कहा कि चरमपंथी ताकतों ने लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने और निर्वाचित पदाधिकारियों को निशाना बनाने की कोशिश की है।

भाजपा सांसद नरेश बंसल ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचार चिंताजनक हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि मतदान शांतिपूर्ण होगा और नई सरकार ऐसे मामलों पर सख्ती से रोक लगाएगी।

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने भी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बांग्लादेश की स्थिति “क्रूर और दमनकारी ताकतों के जंगल जैसी” हो गई है। उन्होंने कहा कि वहां एक संवेदनशील और मजबूत सरकार की जरूरत है, जो लोगों की चिंताओं को समझे और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा करे।

भारत चाहता है समझदार सरकार बने

भाजपा विधायक विक्रम रंधावा ने कहा कि बांग्लादेश की हालत दुनिया से छिपी नहीं है। उन्होंने खासकर हिंदुओं के खिलाफ हो रही टारगेट किलिंग को गंभीर बताते हुए कहा कि भारत चाहता है कि वहां ऐसी सरकार बने जो हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने भी कहा कि भारत और भारत के लोग चाहते हैं कि बांग्लादेश में एक समझदार सरकार आए जो हिंदू, मुस्लिम, सिख या किसी भी समुदाय के नागरिकों का समान रूप से ख्याल रखे।

घुसपैठ और दस्तावेज सत्यापन पर भी बयान

शिवसेना प्रवक्ता शाइना एनसी ने बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जो लोग देश में अवैध रूप से घुसपैठ कर अस्थिरता फैलाना चाहते हैं, उन्हें हटाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इसके लिए सख्त सत्यापन और दस्तावेज जांच भी आवश्यक है।

कांग्रेस ने कहा—कट्टरता बढ़ी, लोकतंत्र बना रहे

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने बांग्लादेश की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि बांग्लादेश को दुनिया ने साहित्य और संस्कृति से पहचाना है, लेकिन मौजूदा स्थिति दर्शाती है कि वहां कट्टरता बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि जरूरी है कि लोकतंत्र कायम रहे और लोग शांतिपूर्ण तरीके से बेहतर विकल्प चुनें।

कांग्रेस नेता राकेश सिन्हा ने कहा कि बांग्लादेश का चुनाव भारत के लिए स्वाभाविक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पड़ोसी देश की स्थिरता का असर दोनों देशों पर पड़ता है।

प्रियंका चतुर्वेदी ने उठाए सवाल

शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि उम्मीद है चुनावों से वहां स्थिर सरकार बनेगी जो लोकतंत्र के सिद्धांतों को लागू करेगी। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर लगातार हमले और हत्याएं होती रहीं, लेकिन इस पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं हुई।

वाम दलों की प्रतिक्रिया

सीपीआई (एम) सांसद वी. शिवदासन ने कहा कि बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी जैसी कट्टरपंथी ताकतें सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में लोकतांत्रिक ताकतें सफल होंगी और बांग्लादेश में शांति कायम होगी।

सीपीआई (एम) विधायक मोहम्मद यूसुफ तारीगामी ने कहा कि चुनाव लोकतंत्र की आत्मा हैं और बांग्लादेश के लोगों को सरकार चुनने का अधिकार है। उन्होंने चिंता जताई कि अगर मुख्य पार्टी अवामी लीग पर प्रतिबंध है, तो चुनाव एकतरफा हो सकता है।

राजस्थान मंत्री का बयान

राजस्थान सरकार के मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि किसी भी देश में अलोकतांत्रिक शासन के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू विरोधी विचारधारा को बढ़ावा देना आपत्तिजनक है और भारत सरकार ने इसकी कड़ी निंदा की है।

चुनाव पर भारत की नजर

कुल मिलाकर बांग्लादेश के चुनाव को लेकर भारत में सभी राजनीतिक दलों की नजरें टिकी हुई हैं। नेताओं की एक साझा उम्मीद यही है कि चुनाव शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों और नई सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा तथा लोकतंत्र की मजबूती को प्राथमिकता दे।

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