
नई दिल्ली: अक्सर नए घरों की लाल ईंटों पर सफेद पाउडर जैसी परत जम जाती है, जिसे तकनीकी भाषा में फ्लोरेसेंस या ग्रामीण भाषा में शोरा कहा जाता है। यह सिर्फ दिखने में ही बेमेल नहीं बल्कि दीवार की मजबूती पर भी असर डाल सकती है। सिविल इंजीनियर विशाल मिश्रा के अनुसार, इसके पीछे मुख्य कारण पानी की खराब गुणवत्ता और उसमें नमक की अधिकता है।
शोरा क्या है:
ईंटों या सीमेंट में मौजूद क्षारीय तत्व और नमक नमी के साथ बाहर आते हैं और सूखने पर सफेद पाउडर की तरह जम जाते हैं। यह बिलकुल वैसा ही है जैसे पसीने के सूखने पर कपड़ों पर सफेद दाग बन जाते हैं।
शोरा लगने के नुकसान:
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मजबूती में कमी: ईंटें भुरभुरा हो जाती हैं।
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प्लास्टर और पेंट का झड़ना: पुट्टी और पेंट जल्दी गिरने लगते हैं।
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सीलन और नमी की समस्या: दीवारें हमेशा गीली महसूस होती हैं और घर में सीलन भरी गंध आती है।
निर्माण के दौरान बचाव के तरीके:
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पानी की जांच: इस्तेमाल होने वाले पानी का पीएच मान 6–8 के बीच होना चाहिए।
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ईंटों की गुणवत्ता: अच्छी तरह पकी हुई ईंटों का चयन करें; कच्ची ईंटें अधिक नमक सोखती हैं।
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ब्रिक बैटिंग: चिनाई से पहले ईंटों को मीठे पानी से धोएं ताकि सतही नमक निकल जाए।
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वाटरप्रूफिंग: प्लास्टर में अच्छे वॉटरप्रूफिंग कंपाउंड का इस्तेमाल करें और नींव में डीपीसी अवश्य करवाएं।
दीवार से शोरा हटाने का उपाय:
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सूखे ब्रश से सफेद पाउडर को रगड़कर हटाएँ।
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हल्के हाइड्रोक्लोरिक एसिड वाले पानी से दीवार धोएं (विशेषज्ञ की देखरेख में)।
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बाजार में उपलब्ध वॉटरप्रूफिंग लिक्विड भी शोरा रोकने में मददगार हैं।
विशाल मिश्रा का संदेश:
“साफ पानी और अच्छी क्वालिटी की ईंटों का उपयोग कर आप अपने घर की दीवारों को लंबे समय तक मजबूत और शोरा-रहित रख सकते हैं। इससे घर की मजबूती और पेंट की उम्र दोनों बढ़ जाती है।”
