Thursday, February 12

‘मैं कभी ENT सर्जन हुआ करता था’ : च्यवनप्राश ऐड ने रद्द कर दिया श्रीराम लागू का मेडिकल लाइसेंस

मुंबई: मराठी और बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता श्रीराम लागू की जिंदगी केवल फिल्मी पर्दे तक सीमित नहीं थी। उन्होंने पहले ईएनटी सर्जन के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी, लेकिन एक विज्ञापन की वजह से उनका मेडिकल लाइसेंस रद्द कर दिया गया।

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डाबर च्यवनप्राश ऐड का विवाद

साल 1980 में लागू डाबर च्यवनप्राश के एक विज्ञापन में नजर आए। उस समय विवाद खड़ा हुआ कि एक डॉक्टर होने के बावजूद उन्होंने पैसों के लिए ऐड किया, जिसे इंडियन मेडिकल काउंसिल (एमसीआई) ने नैतिक टकराव मानते हुए उनके लाइसेंस को रद्द कर दिया और उन्हें मेडिकल प्रैक्टिस से रोक दिया।

थिएटर से एक्टिंग की ओर

श्रीराम लागू ने बीजे मेडिकल कॉलेज से मेडिकल की डिग्री हासिल की और पुणे व तंजानिया में ईएनटी सर्जन के रूप में प्रैक्टिस की। हालांकि, मेडिकल कॉलेज में पहले वर्ष के दौरान उनका परिचय थिएटर से हुआ और उनका जुनून धीरे-धीरे एक्टिंग की ओर बढ़ा। उन्होंने थिएटर और फिल्मों को साथ-साथ जारी रखा।

स्वीकारा था डॉक्टर होने का अनुभव

कुछ साल बाद, तबस्सुम के साथ बातचीत में लागू ने कहा,
“मैं इस वक्त किसी भी तरह का डॉक्टर नहीं हूं। मैं एक समय में ईएनटी सर्जन हुआ करता था।”

फिल्मों में पहचान

श्रीराम लागू मराठी थिएटर के दिग्गज कलाकार माने जाते थे। फिल्मों में उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई और उनकी पॉपुलर फिल्में हैं –
‘गांधी’, ‘विधाता’, ‘लावारिस’, ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘घरौंदा’, ‘किनारा’

निधन

साल 2019 में 92 वर्ष की उम्र में पार्किंसंस से जूझते हुए उनका निधन हो गया।

श्रीराम लागू की कहानी बताती है कि कैसे एक डॉक्टर से फिल्म और थिएटर की दुनिया तक का उनका सफर, उनके जुनून और जीवन के उतार-चढ़ाव से भरा रहा।

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